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“बातचीत का मतलब सरेंडर नहीं” — ईरान के राष्ट्रपति Pezeshkian का अमेरिका को सख्त संदेश
ईरान ने कहा- देश के हितों से कोई समझौता नहीं होगा, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और सुरक्षा गारंटी जरूरी
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि बातचीत करना “सरेंडर” नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और जनता के अधिकारों की रक्षा करते हुए ही किसी भी वार्ता में हिस्सा ले रहा है।
राष्ट्रपति Pezeshkian ने यह बयान उस बैठक के दौरान दिया, जिसमें हालिया 40 दिन लंबे संघर्ष के बाद तबाह हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण पर चर्चा हो रही थी।
“दबाव में नहीं झुकेगा ईरान”
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के दबाव में झुकने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थायी शांति समझौते के लिए ईरान की वैध मांगों को स्वीकार करना होगा। इसमें युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय गारंटी शामिल है।
Pezeshkian ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा “ताकत और अधिकार” के साथ करेगा।
फिर से बनाया जाएगा इंफ्रास्ट्रक्चर
राष्ट्रपति ने यह भी भरोसा दिलाया कि संघर्ष में नष्ट हुए ढांचे को पहले से ज्यादा मजबूत तरीके से दोबारा बनाया जाएगा।
उनके मुताबिक सरकार तेजी से पुनर्निर्माण कार्य शुरू करेगी ताकि आम लोगों की जिंदगी जल्द सामान्य हो सके।
पड़ोसी देशों को दिया संदेश
ईरान ने एक बार फिर कहा कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ टकराव नहीं चाहता। राष्ट्रपति Pezeshkian ने शांतिपूर्ण क्षेत्रीय संबंधों की बात दोहराई, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर किसी देश ने ईरान के खिलाफ हमले में हिस्सा लिया तो उसका जवाब सख्ती से दिया जाएगा।
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अमेरिका पर भरोसे की कमी
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के साथ बातचीत में “विश्वास की कमी” को भी बड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि पहले हुए समझौतों और वादों के अनुभवों ने Tehran को सतर्क बना दिया है।
इसी वजह से ईरान अब किसी भी समझौते में मजबूत सुरक्षा गारंटी और स्पष्ट शर्तों की मांग कर रहा है।

Pakistan की मध्यस्थता में जारी हैं बातचीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बातचीत मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक तेल बाजार दोनों पर बड़ा असर डाल सकती है।
