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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया दांव! बनाई नई अथॉरिटी, जहाजों पर रखी जाएगी हर पल नजर

अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव के बीच ईरान ने Strait of Hormuz के लिए नई संस्था बनाई है, जो जहाजों की गतिविधियों पर रियल-टाइम अपडेट देगी।

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Dainik Diary MR Philip 96
होर्मुज जलडमरूमध्य में गुजरते तेल टैंकर और ईरान की समुद्री निगरानी गतिविधियों की प्रतीकात्मक तस्वीर।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल Strait of Hormuz के लिए नई अथॉरिटी बनाने का ऐलान किया है। इस नई संस्था का नाम Persian Gulf Strait Authority (PGSA) रखा गया है, जो जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों और वहां की गतिविधियों पर real-time updates जारी करेगी।

ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था Supreme National Security Council ने सोमवार को अपने आधिकारिक X अकाउंट पर इसकी जानकारी साझा की। इसके साथ ही Revolutionary Guards Navy ने भी यही पोस्ट शेयर कर संकेत दिया कि यह कदम ईरान की नई रणनीतिक योजना का हिस्सा है।

हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि PGSA के अधिकार कितने व्यापक होंगे, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह संस्था होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की “सार्वभौमिक निगरानी” स्थापित करने का काम करेगी। बताया जा रहा है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को विशेष नियम और निर्देश भी भेजे जा रहे हैं।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाजों को info@pgsa.ir ईमेल के जरिए नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अब इस समुद्री रास्ते पर अधिक नियंत्रण चाहता है और भविष्य में जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना भी बना सकता है।

दरअसल, Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

ईरान ने फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध जैसे हालात बनने के बाद से इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण कर दिया था। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस कारण शिपिंग गतिविधियां काफी प्रभावित हुईं। हालांकि अप्रैल से एक नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब केवल सैन्य ताकत के जरिए नहीं बल्कि strategic maritime control के जरिए भी दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। यानी समुद्री व्यापार मार्गों और ऊर्जा सप्लाई पर पकड़ बनाकर वह वैश्विक शक्तियों को संदेश देना चाहता है।

इस घटनाक्रम ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो इसका असर तेल की कीमतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पर दिखाई दे सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि नई बनाई गई PGSA आगे क्या कदम उठाती है और क्या ईरान वास्तव में जहाजों से शुल्क वसूलने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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