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हमास पर यौन हिंसा का सबसे गंभीर आरोप बंधकों को परिवार के सामने बनाया गया शिकार

इजरायली जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, हमास पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के खिलाफ सुनियोजित यौन हिंसा का आरोप

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Dainik Diary MR Philip 6 15
हमास हमले को लेकर आई नई रिपोर्ट में यौन हिंसा और बंधकों पर अत्याचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष को लेकर एक नई जांच रिपोर्ट ने दुनिया को झकझोर दिया है। हाल ही में सामने आई एक स्वतंत्र इजरायली जांच में दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों और उसके बाद बंधक बनाए गए लोगों के साथ हमास और अन्य फिलिस्तीनी हथियारबंद समूहों ने सुनियोजित तरीके से यौन हिंसा को हथियार की तरह इस्तेमाल किया।

करीब 300 पन्नों की इस रिपोर्ट में ऐसे कई आरोप दर्ज हैं जिन्हें पढ़ना भी बेहद मुश्किल माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के साथ न सिर्फ जीवित अवस्था में बल्कि मौत के बाद भी यौन हिंसा की गई। कई मामलों में परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के सामने अपमानजनक हरकतें करने के लिए मजबूर किए जाने का दावा भी किया गया है।

430 से ज्यादा गवाहों के बयान

रिपोर्ट तैयार करने वाली जांच टीम ने 430 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों, पीड़ितों और पूर्व बंधकों से बातचीत की। इसके अलावा 10 हजार से ज्यादा फोटो और वीडियो की जांच की गई। बताया गया कि हमले के दौरान रिकॉर्ड किए गए कई वीडियो भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल हुए।

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जांच में सामने आया कि हमलावरों ने सिर्फ शारीरिक हिंसा ही नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक तबाही फैलाने की भी कोशिश की। रिपोर्ट में कहा गया कि परिवारों को तोड़ने और लंबे समय तक डर पैदा करने के लिए रिश्तों को हथियार बनाया गया।

नोवा म्यूजिक फेस्टिवल बना हिंसा का केंद्र

रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा अत्याचार नोवा म्यूजिक फेस्टिवल और गाजा सीमा के पास बसे इजरायली इलाकों में हुए। इस फेस्टिवल में 370 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

एक जीवित बचे शख्स राज कोहेन ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से महिलाओं के साथ दरिंदगी होते देखी। उनके अनुसार हमलावरों ने महिलाओं को गाड़ियों से बाहर निकालकर उनके कपड़े उतारे और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। कई पीड़ितों को बाद में मार दिया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी डारिन कोमारोव ने कहा कि चीखें आज भी उनके कानों में गूंजती हैं। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान आसपास सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया।

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बंधकों को बनाया मानसिक यातना का शिकार

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि गाजा में बंधक बनाए गए लोगों के साथ महीनों तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना जारी रही। सुरंगों और सुरक्षित ठिकानों में रखे गए कई बंधकों को लगातार डर और अपमान का सामना करना पड़ा।

17 वर्षीय पूर्व बंधक अगाम गोल्डस्टीन ने बताया कि कैद के दौरान इंसान धीरे-धीरे टूटने लगता है क्योंकि उसके पास अपने शरीर और जिंदगी पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता।

जांच में यह भी कहा गया कि सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों को भी यौन हिंसा का शिकार बनाया गया।

रिपोर्ट में लगाए गए गंभीर आरोप

जांच आयोग की प्रमुख डॉ. कोचाव एलकायम-लेवी ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि सुनियोजित रणनीति थी। उनके मुताबिक यौन हिंसा का इस्तेमाल आतंक फैलाने और समाज को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए किया गया।

रिपोर्ट में इन घटनाओं को युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार जैसी श्रेणियों में रखा गया है। हालांकि हमास पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है बहस

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से बहस तेज हो सकती है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों से इस मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा को लेकर दुनिया भर में पहले भी कई रिपोर्टें सामने आई हैं, लेकिन इस जांच में दर्ज आरोपों की गंभीरता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।

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