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Trump ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, फिर बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत फिर अटकी, ट्रंप बोले- “ईरान की शर्तें पूरी तरह अस्वीकार्य”

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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया।

मध्य पूर्व में पिछले दो महीनों से जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की ओर से भेजे गए शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया हैट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई हफ्तों से परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो सकता है, जिससे लंबे समय से जारी संघर्ष कम होगा। लेकिन अब ट्रंप के सख्त रुख ने हालात को फिर से उलझा दिया है।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक छोटा लेकिन बेहद सख्त संदेश पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पढ़ी है और वह उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आई। ट्रंप ने इसे “TOTALLY UNACCEPTABLE” यानी “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया।

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हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया कि ईरान की तरफ से क्या शर्तें रखी गई थीं, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को लेकर कुछ नई मांगें रखी थीं।

ईरान की क्या थीं शर्तें?

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि वह अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के एक हिस्से को कम स्तर का करेगा और बाकी हिस्से को किसी तीसरे देश में ट्रांसफर करने के लिए तैयार है। लेकिन इसके बदले ईरान ने अमेरिका से गारंटी मांगी थी कि अगर भविष्य में बातचीत विफल होती है या अमेरिका समझौते से बाहर निकलता है, तो वह यूरेनियम वापस किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि यह जवाब पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

अमेरिका की चेतावनी और बढ़ा तनाव

ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने दावा किया कि अगर कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो अमेरिका तुरंत कार्रवाई करेगा।

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ट्रंप के बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव का खतरा फिर बढ़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई बार तनाव चरम पर पहुंच चुका है।

ईरान ने भी दिया कड़ा जवाब

ईरान ने भी अमेरिकी रुख पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने साफ कहा कि अगर अमेरिका ने नए हमले किए, तो ईरान जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही ईरान ने चेतावनी दी कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विदेशी युद्धपोतों की मौजूदगी को और बढ़ने नहीं देगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।

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घरेलू दबाव में हैं ट्रंप

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप पर अमेरिका के भीतर भी दबाव बढ़ रहा है। लगातार चल रहे संघर्ष और बढ़ते सैन्य खर्च को लेकर कई अमेरिकी नागरिक सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में ट्रंप एक तरफ सख्त छवि बनाए रखना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें चुनावी राजनीति का भी ध्यान रखना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू नहीं हुई, तो मध्य पूर्व में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

दुनिया की नजर अब अगले कदम पर

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। कूटनीतिक स्तर पर कई देश दोनों पक्षों को बातचीत जारी रखने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन ट्रंप के हालिया बयान ने साफ कर दिया है कि समझौते की राह अभी आसान नहीं दिख रही।

अगर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।