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ईरान ने यूरेनियम पर रखा थर्ड कंट्री ऑफर, अमेरिका के सामने नई शर्तें रिपोर्ट

Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने परमाणु समझौते में नरम रुख दिखाया, लेकिन अपने परमाणु ढांचे को खत्म करने से किया इनकार

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ईरान ने यूरेनियम को third country में भेजने का प्रस्ताव रखा, अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत फिर सुर्खियों में।

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और युद्धविराम की नाजुक स्थिति के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें उसे किसी third country (तीसरे देश) में स्थानांतरित करने की बात कही गई है।

यह दावा Wall Street Journal की रिपोर्ट में किया गया है, जिसमें बताया गया है कि ईरान ने अमेरिका की नई परमाणु डील प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी है।

ईरान का नया प्रस्ताव क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वह अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम के एक हिस्से को कम स्तर पर करेगा, जबकि बाकी हिस्से को किसी तीसरे देश में भेजा जा सकता है। हालांकि तेहरान ने यह शर्त भी रखी है कि अगर भविष्य में बातचीत विफल होती है, तो यह यूरेनियम वापस लौटाया जाना चाहिए।

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सबसे अहम बात यह है कि ईरान ने साफ तौर पर अपने परमाणु ठिकानों को खत्म करने की मांग को खारिज कर दिया है।

अमेरिका का प्रस्ताव और होर्मुज मुद्दा

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रस्ताव दिया था, जिसमें कहा गया था कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देनी चाहिए। बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों को एक महीने के भीतर हटाने पर विचार कर सकता है।

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यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और किसी भी छोटी घटना से हालात बिगड़ सकते हैं।

परमाणु सुविधाओं पर बड़ा विवाद

ईरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह रहा है।

तेहरान का मानना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा और वैज्ञानिक विकास से जुड़ा है, जबकि पश्चिमी देश इसे सुरक्षा खतरा मानते हैं।

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शांति की कोशिशें या नया टकराव?

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक ईरान ने ट्रंप की योजना को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति आगे चलकर या तो नए समझौते की ओर जा सकती है या फिर तनाव को और बढ़ा सकती है।

वैश्विक असर की आशंका

अगर ईरान, अमेरिका और अन्य देशों के बीच यह गतिरोध लंबा चलता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर किसी भी तरह की अस्थिरता दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश किसी साझा समाधान तक पहुंच पाएंगे या यह तनाव एक नए संकट में बदल जाएगा।