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काले गाउन में हाईकोर्ट पहुंचीं Mamata Banerjee, पोस्ट-पोल हिंसा मामले में खुद रखी दलील
2026 बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में खुद पेश हुईं ममता बनर्जी, पुलिस और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को एक बेहद अलग और चर्चित तस्वीर देखने को मिली, जब तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वकीलों का काला गाउन पहनकर सीधे कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं।
ममता बनर्जी ने 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई कथित हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका मामले में खुद अदालत के सामने अपनी दलील रखी। कोर्ट में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल “बुलडोजर स्टेट” नहीं है और राज्य में चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, लेकिन कई मामलों में पुलिस ने शिकायतें दर्ज करने में लापरवाही बरती।
सुनवाई के दौरान ममता ने दावा किया कि चुनाव के बाद कम से कम 10 टीएमसी समर्थकों की मौत हुई, लगभग 150 पार्टी कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया गया और कई महिलाओं व बच्चों पर भी हमले किए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिका में कहा गया कि चुनाव के बाद कई टीएमसी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपने घर छोड़ने पड़े, जबकि कुछ लोगों को सिर्फ पार्टी से जुड़े होने की वजह से निशाना बनाया गया।
ममता बनर्जी के साथ कोर्ट में वरिष्ठ टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, उनके बेटे शिर्षण्य बंदोपाध्याय और वकील बैस्वनोर चटर्जी भी मौजूद रहे।
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इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि ममता बनर्जी ने एक बार फिर साबित किया है कि वह बंगाल के लोगों को मुश्किल समय में कभी अकेला नहीं छोड़तीं। पार्टी ने उन्हें “साहस, संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों की आवाज” बताया।

टीएमसी ने बीजेपी पर भी हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं बीजेपी की ओर से अभी इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का खुद अदालत में पेश होना केवल कानूनी कदम नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा लंबे समय से बंगाल की राजनीति के केंद्र में रहा है और अब यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है।
