Connect with us

International News

ताइवान पर बढ़ा तनाव तो भड़क सकता है अमेरिका-चीन टकराव! Donald J. Trump को Xi Jinping की बड़ी चेतावनी

बीजिंग में हुई अहम बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे को बताया दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दोस्ती और साझेदारी पर दिया जोर।

Published

on

Dainik Diary MR Philip 1 93
बीजिंग में बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ताइवान मुद्दे पर बढ़ते तनाव के बीच अहम चर्चा करते हुए।

दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर ताइवान को लेकर तनाव गहराता नजर आ रहा है। बीजिंग में आयोजित अहम शिखर वार्ता के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ताइवान मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों के बीच सीधा टकराव भी हो सकता है

यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पहले से ही सैन्य गतिविधियां तेज हैं और चीन लगातार ताइवान के आसपास अपने युद्धाभ्यास बढ़ा रहा है। चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश की तरह संचालित करता है।

बीजिंग में दोस्ती की बातें, लेकिन अंदर ही अंदर तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दो दिवसीय चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे, जहां उन्होंने शी जिनपिंग को “महान नेता” और “दोस्त” बताया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन मिलकर दुनिया के लिए शानदार भविष्य बना सकते हैं।

और भी पढ़ें : भारत को मिला पहला स्वदेशी Semi-High-Speed Rail Corridor, गुजरात में दौड़ेगी नई रफ्तार वाली ट्रेन

हालांकि, शी जिनपिंग का रुख अपेक्षाकृत सख्त दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को “प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार” बनकर रहना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे संवेदनशील कड़ी है।

चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि अगर ताइवान से जुड़ी स्थिति गलत दिशा में गई, तो दोनों देशों के रिश्ते बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच सकते हैं। उनके इस बयान को दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ एक कड़ी कूटनीतिक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

आखिर ताइवान को लेकर इतना विवाद क्यों?

ताइवान एशिया का एक स्वशासित द्वीप है, जिसकी अपनी सरकार, सेना और लोकतांत्रिक व्यवस्था है। लेकिन चीन इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। बीजिंग का कहना है कि “वन चाइना पॉलिसी” के तहत ताइवान को अंततः चीन में शामिल होना चाहिए।

Dainik Diary MR Philip 4 33


पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ताइवान के आसपास बड़े स्तर पर सैन्य अभ्यास किए हैं। इनमें युद्धपोतों की तैनाती, फाइटर जेट उड़ानें और समुद्री घेराबंदी जैसे अभ्यास शामिल रहे हैं। इससे ताइवान के लोगों और उसके सहयोगी देशों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका का ताइवान समर्थन चीन को क्यों खटकता है?

अमेरिका आधिकारिक तौर पर ताइवान को अलग देश नहीं मानता, लेकिन वह लंबे समय से ताइवान को हथियार और सुरक्षा सहयोग देता रहा है। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए करीब 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी थी। हालांकि उसकी पूरी डिलीवरी अभी बाकी है।

और भी पढ़ें : हमास पर यौन हिंसा का सबसे गंभीर आरोप बंधकों को परिवार के सामने बनाया गया शिकार

इसी वजह से चीन को लगता है कि अमेरिका ताइवान को सैन्य रूप से मजबूत कर रहा है और बीजिंग की रणनीतिक चुनौती बढ़ा रहा है। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना चाहता है।

दुनिया की नजरें अब अमेरिका-चीन रिश्तों पर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

चीन और अमेरिका दोनों ही वैश्विक व्यापार, टेक्नोलॉजी और रक्षा के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक संघर्ष वैश्विक बाजारों को हिला सकता है।

फिलहाल दोनों देशों के नेता सार्वजनिक रूप से संवाद और सहयोग की बात कर रहे हैं, लेकिन ताइवान का मुद्दा अब भी दोनों महाशक्तियों के बीच सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *