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Hormuz Strait बंद होते ही दुनिया ‘Red Zone’ में! तेल संकट पर वैश्विक एजेंसियों की बड़ी चेतावनी

ईरान युद्ध के बीच रोजाना 1.4 करोड़ बैरल तेल सप्लाई प्रभावित, IEA बोला – इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट सामने

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Hormuz Strait बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर, दुनिया के सामने गहराया ऊर्जा संकट।

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की तरफ धकेलता नजर आ रहा है। Hormuz Strait के बंद होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है और वैश्विक एजेंसियों ने अब “Red Zone” जैसी गंभीर चेतावनी जारी करनी शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध और समुद्री नाकेबंदी के चलते दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल Hormuz Strait से तेल और गैस की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत समुद्री ऊर्जा सप्लाई गुजरती है।

International Energy Agency (IEA) के प्रमुख Fatih Birol ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा सुरक्षा संकट बन सकता है। उन्होंने बताया कि Hormuz Strait बंद होने से हर दिन करीब 1.4 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर केवल तेल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दुनियाभर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। कई देशों में महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा भी जताया जा रहा है।

दरअसल, Hormuz Strait भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाका है। यह जलमार्ग केवल लगभग 21 किलोमीटर चौड़ा है और ईरान का इस पर रणनीतिक प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि युद्ध के दौरान इस रास्ते को नियंत्रित करना वैश्विक राजनीति का सबसे अहम मुद्दा बन गया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अभी भी काफी हद तक मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर है। ऐसे में अगर सप्लाई बाधित होती है तो एशिया, यूरोप और अमेरिका सभी प्रभावित होंगे। भारत, चीन, जापान और कई यूरोपीय देश पहले ही तेल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जता चुके हैं।

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कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मौजूदा संकट के चलते अब तक करीब एक अरब बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। शेयर बाजारों से लेकर मुद्रा बाजार तक इस तनाव का असर दिखाई देने लगा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संकट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहरे झटके दे सकता है। कई देशों ने अब अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) के इस्तेमाल की तैयारी भी शुरू कर दी है।

दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होंगे या फिर Hormuz Strait का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित करेगा। फिलहाल ऊर्जा बाजार में डर और अनिश्चितता दोनों साफ दिखाई दे रहे हैं।