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Politics

2027 UP चुनाव से पहले Akhilesh’s का बड़ा दांव, seat sharing पर Congress की बढ़ी tension

‘विनेबिलिटी फर्स्ट’ फॉर्मूले के जरिए समाजवादी पार्टी ने INDIA गठबंधन में अपनी शर्तें साफ कर दी हैं, कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर उठे सवाल।

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UP Election 2027: अखिलेश यादव के सीट शेयरिंग फॉर्मूले से कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल
2027 यूपी चुनाव से पहले सीट शेयरिंग को लेकर अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच बढ़ी सियासी खींचतान।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो चुकी है। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने INDIA गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर ऐसा दांव चला है, जिसने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि गठबंधन में सीटें केवल राजनीतिक समझौते के आधार पर नहीं, बल्कि “विनेबिलिटी” यानी जीतने की क्षमता के आधार पर दी जाएंगी। इसके लिए कांग्रेस समेत सहयोगी दलों से उन सीटों की सूची मांगी गई है, जहां उनके उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं और भाजपा को सीधी चुनौती दे सकते हैं।

SP नेतृत्व अब हर सीट पर उम्मीदवार की जातीय समीकरण, स्थानीय पकड़ और संगठनात्मक ताकत का आकलन करेगा। पार्टी का मानना है कि सिर्फ गठबंधन बचाने के लिए कमजोर उम्मीदवार उतारना भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद अखिलेश यादव खुद को उत्तर प्रदेश में विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा मान रहे हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी अब गठबंधन की कमान पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहती है।

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस करीब 150 सीटों की मांग कर रही है। लेकिन समाजवादी पार्टी के भीतर यह राय बन रही है कि कांग्रेस के पास इतने बड़े स्तर पर मजबूत जमीनी उम्मीदवार नहीं हैं। इसी कारण SP लगभग 40 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नजर नहीं आ रही।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बहुजन समाज पार्टी के साथ संवाद की संभावनाएं तलाशने की कोशिश की थी। हालांकि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती कि INDIA गठबंधन में कोई समानांतर राजनीतिक रणनीति चले। SP चाहती है कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन पूरी तरह उसके नेतृत्व में आगे बढ़े।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अब “परफॉर्मेंस बेस्ड अलायंस मॉडल” पर काम कर रहे हैं। यानी जिस दल के पास जितनी मजबूत जमीन और जीतने वाले उम्मीदवार होंगे, उसे उतनी ही सीटें मिलेंगी।

UP Election 2027: अखिलेश यादव के सीट शेयरिंग फॉर्मूले से कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल


इस रणनीति से कांग्रेस पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। पार्टी को अब सिर्फ राष्ट्रीय पहचान के भरोसे नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों और संगठन की ताकत भी दिखानी होगी।

उत्तर प्रदेश की 402 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी मानी जा रही है, लेकिन सीट शेयरिंग का यह नया फॉर्मूला आने वाले दिनों में INDIA गठबंधन के भीतर खींचतान को और बढ़ा सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि 2027 का मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि विपक्ष के भीतर नेतृत्व और सीटों की लड़ाई का भी बड़ा मैदान बनने जा रहा है।