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Politics

नॉर्वे के अखबार में PM Modi का कार्टून बना विवाद की वजह, सोशल मीडिया पर भड़के लोग

नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार में छपे कार्टून को लेकर उठा विवाद, कई यूजर्स ने बताया ‘नस्लवादी’ और ‘औपनिवेशिक सोच’ का उदाहरण

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प्रधानमंत्री Narendra Modi की नॉर्वे यात्रा के बीच वहां के एक बड़े अखबार में प्रकाशित कार्टून ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। नॉर्वे के प्रमुख समाचार पत्र Aftenposten में छपे एक ओपिनियन आर्टिकल में पीएम मोदी को सपेरा दिखाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

यह लेख पत्रकार Frank Rossavik ने लिखा था, जिसका शीर्षक था — “A clever and slightly annoying man”। हालांकि यह लेख 16 मई को प्रकाशित हुआ था, लेकिन पीएम मोदी की ओस्लो यात्रा के बाद यह तेजी से चर्चा में आ गया।

कार्टून में पीएम मोदी को पारंपरिक सपेरे की मुद्रा में दिखाया गया है, जहां सांप की जगह ईंधन पाइप जैसी आकृति दिखाई गई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे भारत और भारतीयों की पुरानी रूढ़िवादी छवि से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया।

एक यूजर ने लिखा कि यह “पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता” को दर्शाता है और भारत की वैश्विक प्रगति को कमतर दिखाने की कोशिश है। वहीं दूसरे यूजर ने इसे “सीधा नस्लवादी चित्रण” बताते हुए कहा कि जब दुनिया भारत की आर्थिक और डिजिटल ताकत का मुकाबला नहीं कर पाती, तब ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि पश्चिमी देशों का एक वर्ग आज भी भारत को उसी पुराने नजरिए से देखने की कोशिश करता है, जबकि आज भारत वैश्विक राजनीति, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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हालांकि, विवाद के बीच कई लोगों ने यह भी कहा कि ओपिनियन आर्टिकल और राजनीतिक कार्टून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा होते हैं। लेकिन आलोचकों का मानना है कि किसी देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री को इस तरह दिखाना सम्मानजनक पत्रकारिता की सीमा से बाहर जाता है।

लेख में पीएम मोदी की विदेश नीति का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया कि भारत नॉर्डिक देशों के साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी, डिजिटलाइजेशन और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े सहयोग को मजबूत करना चाहता है। लेख में यह भी लिखा गया कि जहां अमेरिका “America First” की बात करता है, वहीं मोदी “India First” की नीति के साथ दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार और तकनीकी समझौते बढ़ा रहे हैं।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना हुआ है। कई भारतीय यूजर्स इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक व्यंग्य मान रहे हैं।

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