Connect with us

Politics

ये Recusal नहीं, Judicial Discipline है केजरीवाल केस से अलग हुईं जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा

दिल्ली हाई कोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी। जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि Contempt Proceedings शुरू होने के बाद निष्पक्षता बनाए रखना न्यायिक अनुशासन का हिस्सा है।

Published

on

Dainik Diary MR Philip 4 34
दिल्ली हाई कोर्ट में शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा और अरविंद केजरीवाल।

दिल्ली की चर्चित Excise Policy Case में एक नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट की जज Justice Swarana Kanta Sharma ने गुरुवार को कहा कि अब Arvind Kejriwal और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी।

हालांकि उन्होंने साफ किया कि इसे उनका Recusal यानी खुद को मामले से अलग करना नहीं माना जाना चाहिए। जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह Judicial Discipline यानी न्यायिक अनुशासन के तहत लिया गया है।

“जज के लिए यह एक अकेली लड़ाई होती है”

सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब किसी जज को निशाना बनाया जाता है, तो वह उसके लिए “बहुत अकेली लड़ाई” होती है।

और भी पढ़ें : हमास पर यौन हिंसा का सबसे गंभीर आरोप बंधकों को परिवार के सामने बनाया गया शिकार

उन्होंने कहा,
“This is not recusal. This is judicial discipline.”

दरअसल, जस्टिस शर्मा ने हाल ही में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ Contempt Proceedings शुरू की थीं। अदालत का मानना था कि कुछ बयानों और आरोपों के जरिए न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल उठाए गए।

Dainik Diary MR Philip 1 94


केजरीवाल ने लगाए थे पक्षपात के आरोप

शराब नीति मामले में प्रमुख आरोपी माने जा रहे अरविंद केजरीवाल की तरफ से अदालत में यह मांग उठाई गई थी कि जस्टिस शर्मा इस केस की सुनवाई से खुद को अलग करें।

उनकी ओर से कहा गया था कि जज कुछ ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुई थीं जिनका संबंध RSS से बताया गया। इसी आधार पर निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे।

लेकिन जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पक्षपात साबित करने के लिए कोई ठोस आधार या सबूत पेश नहीं किया गया है। उन्होंने सुनवाई से हटने से इनकार कर दिया था।

अब दूसरी बेंच करेगी सुनवाई

गुरुवार को अदालत में जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि चूंकि उन्होंने Contempt Proceedings शुरू कर दी हैं, इसलिए उचित यही होगा कि मुख्य केस की सुनवाई कोई दूसरी बेंच करे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अदालत की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि न्यायपालिका किसी भी विवाद से ऊपर रहकर संस्थागत संतुलन बनाए रखना चाहती है।

शराब नीति केस बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

दिल्ली की कथित शराब नीति घोटाला मामला पिछले लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। CBI और ED जैसी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।

आम आदमी पार्टी लगातार इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में गंभीर अनियमितताओं के सबूत मिले हैं।

अब इस केस की सुनवाई नई बेंच में होने से आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। राजनीतिक गलियारों से लेकर कानूनी विशेषज्ञों तक, हर कोई यह देखने का इंतजार कर रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।