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15 साल Theatre करने के बाद मिला पहला बड़ा मौका, पिता के accident ने बदल दी थी जिंदगी; बोलीं रंजना आंज्जन

वेटरन अभिनेता आंज्जन श्रीवास्तव की बेटी रंजना ने परिवार के संघर्ष, आर्थिक मुश्किलों और अपने एक्टिंग सफर को लेकर किया भावुक खुलासा।

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रंजना आंज्जन ने बताया परिवार का संघर्ष, 2002 में पिता के एक्सीडेंट के बाद बदली जिंदगी
रंजना आंज्जन ने पिता आंज्जन श्रीवास्तव के संघर्ष और अपने थिएटर सफर को लेकर किए भावुक खुलासे।

टीवी और फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता Aanjjan Srivastav की बेटी रंजना आंज्जन इन दिनों अपनी पहली फिल्म ‘चांद तारा’ को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म के ट्रेलर को कान्स फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया, जिसने रंजना के करियर को नई पहचान दी है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे संघर्ष, इंतजार और आर्थिक परेशानियों से भरी लंबी कहानी छिपी है।

करीब 15 साल थिएटर में काम करने के बाद रंजना को स्क्रीन पर पहला बड़ा मौका मिला। उन्होंने बताया कि फिल्म के लिए उन्हें शूटिंग शुरू होने से सिर्फ चार दिन पहले फाइनल किया गया था। लगातार ऑडिशन और स्क्रीन टेस्ट के बाद यह मौका मिला, जिससे वह बेहद भावुक हो गई थीं।

रंजना ने कहा कि इतने साल मेहनत करने के बाद जब पहली फिल्म मिली तो वह खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। उनके मुताबिक थिएटर ने उन्हें सिर्फ एक्टिंग नहीं सिखाई, बल्कि अनुशासन, धैर्य और संघर्ष से लड़ना भी सिखाया।

उन्होंने अपने पिता Aanjjan Srivastav के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा उन्हें सिर्फ एक्टिंग पर निर्भर न रहने की सलाह दी। रंजना पेशे से ग्राफिक डिजाइनर भी हैं। उनके पिता का मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में काम हमेशा स्थिर नहीं रहता, इसलिए किसी दूसरी स्किल का होना बेहद जरूरी है।

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रंजना ने परिवार के सबसे मुश्किल दौर का जिक्र करते हुए बताया कि साल 2002 में उनके पिता को स्टेज पर परफॉर्म करते समय गंभीर चोट लगी थी। इसके बावजूद उन्होंने शो पूरा किया। लेकिन इसके बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया क्योंकि इंडस्ट्री में काम रुकने लगा था।

रंजना आंज्जन ने बताया परिवार का संघर्ष, 2002 में पिता के एक्सीडेंट के बाद बदली जिंदगी


उन्होंने कहा कि ऐसे दिन भी आए जब परिवार को पैसों की चिंता सताने लगी थी। यही वजह है कि उनके पिता हमेशा बैंक बैलेंस और आर्थिक सुरक्षा को अहम मानते थे। रंजना के मुताबिक इसी सीख ने उन्हें मुश्किल समय में भी आत्मनिर्भर बनाए रखा।

रंजना ने यह भी कहा कि थिएटर से जुड़ाव ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में कला को हमेशा ईमानदारी और समर्पण के साथ देखा गया, न कि सिर्फ शोहरत पाने के जरिये के तौर पर।

अब ‘चांद तारा’ के जरिए रंजना बड़े पर्दे पर अपनी नई शुरुआत करने जा रही हैं और दर्शकों को उनसे काफी उम्मीदें हैं।