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PM Modi की विदेश यात्रा का बड़ा असर, भारत को मिले $40B के निवेश प्रस्ताव
इटली के साथ रिश्ते हुए और मजबूत, रक्षा से लेकर क्लीन एनर्जी तक कई अहम समझौतों पर लगी मुहर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा भारत के लिए कई मायनों में बेहद अहम साबित हुई है। इस दौरे के दौरान भारत को करीब 40 बिलियन डॉलर यानी लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। साथ ही इटली के साथ भारत के रिश्तों को भी एक नए स्तर पर पहुंचाते हुए दोनों देशों ने “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का ऐलान किया।
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान दुनिया की 50 से ज्यादा बड़ी कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की। इन बैठकों में सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में निवेश को लेकर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि कई वैश्विक कंपनियों ने भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने की इच्छा जताई है। इससे आने वाले वर्षों में रोजगार, टेक्नोलॉजी और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिल सकती है।
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारत और इटली के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी रही। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। माना जा रहा है कि इससे यूरोप में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात भी चर्चा का केंद्र रही। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य में दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकती है।
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इस यात्रा में सांस्कृतिक कूटनीति की भी खास झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के नेताओं और प्रतिनिधियों को असम की प्रसिद्ध मूगा सिल्क और मणिपुर की शिरुई लिली से प्रेरित स्टोल भेंट किए। इन उपहारों के जरिए भारत की समृद्ध हस्तकला और पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं बल्कि वैश्विक निवेश और रणनीतिक साझेदारी का अहम केंद्र बनता जा रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता और तेज विकास दर विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत की आर्थिक और कूटनीतिक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन निवेश प्रस्तावों और समझौतों का असर देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक छवि दोनों पर देखने को मिल सकता है।
