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ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे Donald Trump का बड़ा ऐलान, यूरेनियम कब्जे में लेने की बात कही
व्हाइट हाउस में ट्रंप बोले – ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हासिल कर नष्ट कर देंगे, तेहरान ने सौंपने से किया इनकार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब और ज्यादा गंभीर होता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को अपने कब्जे में लेगा और जरूरत पड़ने पर उसे नष्ट भी कर देगा।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम उसे हासिल करेंगे। हमें उसकी जरूरत नहीं है, हम उसे रखना भी नहीं चाहते। संभव है कि उसे हासिल करने के बाद नष्ट कर दें, लेकिन हम ईरान को उसे रखने नहीं देंगे।”
दरअसल, अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि तेहरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता आया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास करीब 900 पाउंड हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा लगभग एक साल पहले किए गए हवाई हमलों के बाद इस यूरेनियम को भूमिगत ठिकानों में छिपा दिया गया था।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यही यूरेनियम मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। अमेरिका इसे ईरान के संभावित परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़कर देख रहा है, जबकि ईरान इसे अपने राष्ट्रीय अधिकार और सुरक्षा का हिस्सा बता रहा है।
इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने आदेश दिया है कि देश के “करीब हथियार-ग्रेड” यूरेनियम को किसी भी हालत में विदेश नहीं भेजा जाएगा। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ सकता है। ईरान युद्ध को लेकर पहले ही अमेरिका में बहस तेज है और विपक्ष ट्रंप प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहा है।

उधर, मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Hormuz Strait संकट, तेल सप्लाई में बाधा और बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी बड़े कदम का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिका वास्तव में ईरान के यूरेनियम भंडार को कब्जे में लेने की कोशिश करता है, तो इससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है। कई देशों ने पहले ही कूटनीतिक समाधान की अपील की है ताकि हालात युद्ध की और खतरनाक दिशा में न बढ़ें।
फिलहाल दुनिया की नजर वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी है। क्योंकि यह विवाद अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
