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ईरान पर अमेरिकी नरमी की खबर से तेल बाजार में हलचल, अचानक गिरने लगे कच्चे तेल के दाम
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से रोक सकता है, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में तेजी लौट आई।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सोमवार को वैश्विक तेल बाजार में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। दिनभर बढ़त में रहने वाले कच्चे तेल के दाम शाम होते-होते नीचे आ गए। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरानी मीडिया में आई एक रिपोर्ट बनी, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका ईरान के कच्चे तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमत हो सकता है।
हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाजार पर इसका असर तुरंत दिखाई दिया। निवेशकों और ट्रेडर्स ने इस रिपोर्ट को संभावित राहत संकेत माना, जिसके बाद तेल की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई और शेयर बाजारों में तेजी लौट आई।
रिपोर्ट Tasnim News Agency में प्रकाशित हुई थी, जिसमें एक अनाम सूत्र के हवाले से कहा गया कि युद्ध खत्म कराने के लिए जारी बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारी ईरानी तेल निर्यात पर नरमी दिखा सकते हैं। यही खबर बाजार में चर्चा का केंद्र बन गई।
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दरअसल, पिछले कुछ समय से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को हिला कर रख दिया था। खासकर Strait of Hormuz में बने हालात ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
तनाव बढ़ने के कारण इस इलाके में तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी, जिससे कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर चले गए थे। लेकिन जैसे ही अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की खबर सामने आई, बाजार ने राहत की सांस ली।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह खबर सही साबित होती है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आ सकती है। Forex.com के विश्लेषक फवाद रजाकजादा ने कहा कि अगर रिपोर्ट की पुष्टि होती है, तो यह एक सकारात्मक शुरुआत मानी जाएगी।

इस खबर का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशियाई बाजारों में जहां पहले गिरावट देखी जा रही थी, वहीं बाद में यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजारों में सुधार नजर आया। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है।
हालांकि कई विश्लेषकों ने सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। उनका कहना है कि अभी तक अमेरिका या ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह केवल अफवाह है या फिर वास्तव में दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता होने वाला है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की वैश्विक कीमतों और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
