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ईरान युद्ध रोकने के लिए चीन के दरवाजे पर पाकिस्तान! Asim Munir और Shehbaz Sharif की बड़ी कोशिश

US-Iran तनाव के बीच पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका, चीन से शांति बहाली में मदद की उम्मीद

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चीन दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर, मिडिल ईस्ट संकट पर हो सकती है अहम चर्चा।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान युद्ध को लेकर अब पाकिस्तान की कूटनीतिक गतिविधियां तेज़ होती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों चीन दौरे पर हैं, जहां वे चीनी नेताओं के साथ अहम बातचीत कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने चीन से भी मदद मांगी है ताकि मिडिल ईस्ट में जल्द शांति बहाल हो सके।

चीन क्यों बना अहम खिलाड़ी?

हालांकि इस पूरे संकट में चीन अब तक अपेक्षाकृत शांत भूमिका में नजर आया है, लेकिन पर्दे के पीछे वह लगातार खाड़ी देशों और संबंधित पक्षों से बातचीत करता रहा है।

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चीन पहले भी मिडिल ईस्ट के कई मामलों में कूटनीतिक भूमिका निभा चुका है। बीजिंग ने हाल ही में कहा था कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर “मिडिल ईस्ट में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए सकारात्मक योगदान” देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती वैश्विक ताकत और उसके आर्थिक हितों की वजह से वह इस संकट को जल्द खत्म होते देखना चाहता है। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का असर तेल सप्लाई और वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

आसिम मुनीर पहले पहुंचे थे तेहरान

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर शुक्रवार और शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में भी मौजूद थे। उनके साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे।

बताया जा रहा है कि यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा था। पाकिस्तान लंबे समय से दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।

पिछले महीने पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच आमने-सामने की ऐतिहासिक बातचीत भी करवाई थी। हालांकि वह बातचीत किसी स्थायी समझौते तक नहीं पहुंच सकी।

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चीन दौरे पर क्या हो सकती है चर्चा?

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शनिवार को चीन के पूर्वी प्रांत झेजियांग के हांगझोउ शहर पहुंचे थे। उनका यह चार दिन का आधिकारिक दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है।

इस दौरान आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और मिडिल ईस्ट संकट पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। पाकिस्तान की कोशिश है कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते का रास्ता निकालने में मदद करे।

पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका

हाल के दिनों में पाकिस्तान खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। खासकर मिडिल ईस्ट के मुद्दों पर इस्लामाबाद लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पाकिस्तान इस संकट में कोई सकारात्मक भूमिका निभाने में सफल होता है, तो इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भी फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के बीच अंतिम समझौता कब तक हो पाएगा। लेकिन पाकिस्तान और चीन की बढ़ती सक्रियता ने यह जरूर संकेत दिया है कि पर्दे के पीछे शांति बहाली की कोशिशें लगातार जारी हैं।

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