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न्यूक्लियर डस्ट सौंप दो वरना अंजाम भुगतो! Trump की ईरान को खुली चेतावनी, US ने फिर किए ताज़ा हमले
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और नावों पर किए “सेल्फ-डिफेंस” स्ट्राइक
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि ईरान को अपना “एनरिच्ड यूरेनियम” अमेरिका को सौंपना होगा, ताकि उसे नष्ट किया जा सके।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि “न्यूक्लियर डस्ट” यानी संवर्धित यूरेनियम या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाए या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में ईरान के भीतर ही उसे नष्ट किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में एटॉमिक एनर्जी कमीशन या उसके समकक्ष संस्था की मौजूदगी जरूरी होगी।
दरअसल, अमेरिका लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिए न्यूक्लियर हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, तेहरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और रिसर्च के लिए है।
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इसी बीच अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में ताज़ा सैन्य कार्रवाई भी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए “सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक” की गई। इन हमलों में ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और उन नावों को निशाना बनाया गया जो कथित तौर पर समुद्र में माइंस बिछाने की तैयारी कर रही थीं।
इस सैन्य कार्रवाई ने उस नाजुक सीज़फायर को भी खतरे में डाल दिया है, जो 8 अप्रैल से लागू माना जा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और हमले इसी तरह जारी रहे, तो पूरा मिडिल ईस्ट एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का यह सख्त रुख अमेरिकी चुनावी रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। ट्रंप लगातार खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोक सकते हैं।
दूसरी ओर, ईरान के भीतर भी अमेरिका विरोधी माहौल और ज्यादा मजबूत हो सकता है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कई बार तनाव बढ़ा है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं क्योंकि इसमें सीधे सैन्य हमले और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे शामिल हैं।
दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान ट्रंप की चेतावनी के बाद कोई नरम रुख अपनाता है या फिर जवाबी कार्रवाई के जरिए हालात और बिगड़ते हैं। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
