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India-US Nuclear Energy Partnership में बड़ा संकेत: Sergio Gor बोले “Big Things Ahead”
Shanti Act 2025 के बाद बढ़े सहयोग के अवसर, न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में नई संभावनाओं की उम्मीद
ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते एक नए मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच nuclear energy collaboration में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह बयान तब आया जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने अपने X (पूर्व Twitter) पोस्ट में बताया कि उन्होंने एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें Nuclear Energy Institute और US-India Strategic Partnership Forum के सदस्य शामिल थे। यह बैठक US Nuclear Executive Mission to India के तहत आयोजित की गई थी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए Sergio Gor ने कहा, “Big things ahead in India-US collaboration on nuclear energy.” उनके इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बयान ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लागू हुआ Shanti Act 2025 इस सहयोग को और मजबूती दे सकता है। इस कानून ने कमर्शियल न्यूक्लियर इंडस्ट्री के लिए भारत के साथ काम करने के कई नए रास्ते खोल दिए हैं, जिससे निवेश और तकनीकी साझेदारी दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका अगर इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो यह न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम होगा, बल्कि clean energy transition को भी तेज कर सकता है। भारत पहले से ही अपने ऊर्जा ढांचे में परमाणु ऊर्जा को एक स्थायी विकल्प के रूप में विकसित करने पर जोर दे रहा है।

उदाहरण के तौर पर, जैसे हाल के वर्षों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं ने भारत के कई राज्यों—जैसे राजस्थान और गुजरात—में ऊर्जा उत्पादन को बदल दिया है, उसी तरह न्यूक्लियर एनर्जी सहयोग आने वाले समय में बड़े पैमाने पर बेसलोड पावर सप्लाई में भूमिका निभा सकता है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच तकनीकी भरोसे और रणनीतिक साझेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत को अत्याधुनिक रिएक्टर टेक्नोलॉजी और निवेश दोनों का लाभ मिल सकता है।
हालांकि, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुरक्षा, नियमों और सार्वजनिक सहमति जैसे कई पहलुओं पर भी काम करना होगा। फिर भी, मौजूदा संकेत बताते हैं कि दोनों देश इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर, Sergio Gor का यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं बल्कि एक संभावित बड़े ऊर्जा समझौते की झलक माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।
