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12 साल के बच्चे ने ड्रोन को पहचानकर बचाई परिवार की जान! Ukraine युद्ध की दर्दनाक कहानी ने दुनिया को झकझोरा

रूस सीमा के पास रहने वाले 12 वर्षीय अनातोली ने ड्रोन की आवाज सुनते ही खतरे को पहचान लिया और अपने छोटे भाई-बहनों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा।

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रूस सीमा के पास Ukraine के गांव में ड्रोन हमलों के डर के बीच रहने वाला 12 वर्षीय अनातोली प्रोखोरेंको।

Ukraine-Russia युद्ध ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है, लेकिन इस बार जो कहानी सामने आई है उसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया। यह कहानी किसी सैनिक की नहीं, बल्कि 12 साल के एक ऐसे बच्चे की है जिसने अपनी समझदारी और हिम्मत से अपने परिवार को बड़े खतरे से बचाने की कोशिश की।

यूक्रेन के उत्तरी Chernihiv क्षेत्र में रहने वाला 12 वर्षीय अनातोली प्रोखोरेंको उस शाम एक पड़ोसी के घर के पास नाशपाती के पेड़ पर चढ़ा हुआ था। वह टूटी हुई शाखाएं काटने में मदद कर रहा था। तभी उसे एक ऐसी आवाज सुनाई दी जो अब वहां के लोगों के लिए डर का दूसरा नाम बन चुकी है — ड्रोन की भनभनाहट।

अनातोली तुरंत समझ गया कि मामला गंभीर है। क्योंकि इससे पहले भी उसके गांव में ड्रोन हमले हो चुके थे। मार्च महीने में एक ड्रोन ने गांव की दुकान के पास खड़ी कार को तबाह कर दिया था, जबकि एक और धमाका उसके घर वाली सड़क पर सिर्फ एक दिन पहले हुआ था।

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सीधे घर की तरफ बढ़ रहा था ड्रोन

अनातोली ने देखा कि काले रंग का एक क्वाडकॉप्टर जमीन के बेहद करीब उड़ते हुए सीधे उसके घर की तरफ बढ़ रहा है। उसी जगह उसके तीन छोटे भाई-बहन दूसरे बच्चों के साथ खेल रहे थे।

एक 12 साल के बच्चे के लिए यह पल बेहद डरावना हो सकता था, लेकिन अनातोली ने घबराने के बजाय तेजी से स्थिति को समझा। युद्ध के बीच रहते-रहते वह ड्रोन की आवाज और उसके खतरे को पहचानना सीख चुका था।

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Ukraine के बच्चों का बदलता बचपन

यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उस दर्दनाक सच की तस्वीर है जिसमें Ukraine के बच्चे अपना बचपन गुजार रहे हैं।

जहां दुनिया के ज्यादातर बच्चे स्कूल, खेल और मोबाइल ऐप्स की बात करते हैं, वहीं युद्ध प्रभावित इलाकों के बच्चे अब ड्रोन की आवाज पहचानना और छिपने की जगह ढूंढना सीख रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में छोटे कमर्शियल ड्रोन अब सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। ये सस्ते होते हैं, आसानी से उड़ाए जा सकते हैं और कई बार नागरिक इलाकों को भी निशाना बना लेते हैं।

युद्ध ने बदल दी गांव की जिंदगी

रूस सीमा से सिर्फ कुछ मील दूर बसे इस छोटे से गांव में लोग लगातार डर के साये में जी रहे हैं। खेत, सड़कें और घर — सब कुछ अब सामान्य नहीं रह गया।

गांव के लोग बताते हैं कि अब बच्चों का बाहर खेलना भी जोखिम भरा हो चुका है। ड्रोन की आवाज सुनते ही लोग तुरंत घरों या बंकरों की तरफ भागते हैं।

अनातोली की कहानी इस बात का उदाहरण बन गई है कि युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि उसका असर मासूम बच्चों के दिल और दिमाग पर भी पड़ता है।

दुनिया भर में हो रही चर्चा

सोशल मीडिया पर अब अनातोली की बहादुरी की चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि एक ऐसा बच्चा जिसे किताबों और खेलों में व्यस्त होना चाहिए था, वह अब अपने परिवार की सुरक्षा के बारे में सोचने को मजबूर है।

यह कहानी दुनिया को यह याद दिलाती है कि युद्ध की सबसे बड़ी कीमत अक्सर आम लोग और बच्चे चुकाते हैं।

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