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Trump ने क्यों रुकवाई ईरान-अमेरिका टकराव की आग? पाकिस्तान का नाम लेकर दिया बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के अनुरोध पर ही ईरान के साथ संघर्षविराम का समर्थन किया गया, साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सख्त चेतावनी दी।
दुनिया की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ संघर्षविराम को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ सीजफायर का समर्थन अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अनुरोध पर किया था।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर पाकिस्तान की तरफ से अनुरोध नहीं आता तो वह इस संघर्षविराम के पक्ष में नहीं होते। उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए उन्हें “बेहतरीन लोग” बताया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया किसी बड़े युद्ध की आशंका से चिंतित है।
पाकिस्तान का नाम लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने बातचीत में कहा कि अमेरिका ने संघर्षविराम को “पाकिस्तान के लिए एक एहसान” के तौर पर स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अमेरिका ने उसकी अपील का सम्मान किया।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक संदेश नहीं बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी बड़ा संकेत है। इससे यह भी साफ होता है कि अमेरिका अब मध्य पूर्व और एशिया की राजनीति को नए तरीके से देखने लगा है।
ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे: ट्रंप
ट्रंप ने इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
उन्होंने कहा कि तेहरान के पास वर्षों से जमा किया गया समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) है और उसे इसे छोड़ना होगा। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका भविष्य में ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ट्रंप की भाषा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आक्रामक दिखाई दे रही है। यही वजह है कि इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों से लेकर तेल की कीमतों तक में हलचल देखी जा रही है।
चीन यात्रा से लौटते वक्त दिया बयान
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने यह बयान चीन यात्रा से लौटते समय दिया। माना जा रहा है कि चीन, ईरान और पाकिस्तान के बढ़ते रिश्तों के बीच अमेरिका अब अपनी रणनीति को और मजबूत करने में जुट गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु शक्ति बनकर पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ और मजबूत करे। वहीं पाकिस्तान के जरिए सीजफायर की बात सामने आना यह दिखाता है कि इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों की पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका रही है।
दुनिया की नजरें अब ईरान पर
ट्रंप के बयान के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिक गई हैं। अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार करता है तो आने वाले दिनों में तनाव फिर बढ़ सकता है।
हालांकि फिलहाल संघर्षविराम लागू है, लेकिन हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाएं लगातार दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं।
मध्य पूर्व की राजनीति में यह नया मोड़ आने वाले दिनों में अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
