International News
ईरान ने अमेरिका को सुनाई खरी-खरी! बोले अराघची Iran से जुड़ी किसी भी समस्या का सैन्य हल नहीं
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की कमी बातचीत को कमजोर कर रही है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपना सख्त लेकिन संतुलित रुख रखा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा कि Iran से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता।
अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब US-Iran रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच दूरी पहले से ज्यादा गहरी हो चुकी है।
“भरोसे की कमी सबसे बड़ी समस्या”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अराघची ने कहा कि Iran और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत “भरोसे की कमी” की वजह से प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए घटनाक्रम ने आपसी विश्वास को कमजोर किया है।
और भी पढ़ें : “मैं नहीं चाहती Saraayah भी मेरी तरह लोगों को खुश करती फिरे” Kiara Advani का दिल छू लेने वाला खुलासा
उन्होंने कहा कि अगर किसी भी बातचीत को सफल बनाना है तो सबसे पहले विश्वास बहाल करना जरूरी होगा। सिर्फ दबाव या सैन्य ताकत से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता।
Iran ने दुनिया को दिया बड़ा संदेश
अराघची के बयान को सिर्फ अमेरिका के जवाब के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि Iran युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर ईरान की संप्रभुता या सुरक्षा को खतरा पहुंचता है तो देश अपने हितों की रक्षा करना जानता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि Iran इस समय अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को एक जिम्मेदार देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है ताकि वैश्विक समर्थन हासिल किया जा सके।
नई दिल्ली में क्यों अहम रहा यह बयान?
भारत की राजधानी नई दिल्ली में दिया गया यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से Iran और अमेरिका दोनों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को देखते हुए भारत नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा खराब हों। ऐसे में नई दिल्ली से दिया गया अराघची का बयान कूटनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ रही बेचैनी
इस बीच पश्चिम एशिया में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। तेल बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार तक हर जगह इस तनाव का असर दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर US-Iran के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और Iran के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो जाते हैं।
