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सऊदी अरब में पाकिस्तान की बड़ी सैन्य तैनाती! ईरान युद्ध के बीच भेजे हजारों सैनिक और फाइटर जेट्स
ईरान संकट के दौरान पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिक, JF-17 लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए, रिपोर्ट से मचा भू-राजनीतिक हलचल का माहौल।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब की सैन्य साझेदारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। नई रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में हजारों सैनिकों के साथ लड़ाकू विमानों और एयर डिफेंस सिस्टम की बड़ी तैनाती की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पाकिस्तान खुद ईरान संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने लगभग 8,000 सैनिक, एक पूरा फाइटर जेट स्क्वाड्रन और एयर डिफेंस यूनिट सऊदी अरब भेजी है। बताया जा रहा है कि इन विमानों में ज्यादातर JF-17 Thunder फाइटर जेट शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। करीब 16 विमानों का यह स्क्वाड्रन सऊदी अरब की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार यह तैनाती केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूरी तरह combat-ready force मानी जा रही है। यानी अगर सऊदी अरब पर किसी प्रकार का बड़ा हमला होता है, तो पाकिस्तानी सेना सीधे सैन्य सहायता देने की स्थिति में रहेगी।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान इस समय ईरान और दूसरे क्षेत्रीय देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश भी कर रहा है। ऐसे में एक तरफ मध्यस्थता और दूसरी तरफ सैन्य तैनाती ने कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पाकिस्तान दोनों देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंध संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल एक गोपनीय रक्षा समझौता हुआ था। हालांकि उसकी पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गईं, लेकिन दोनों देशों ने यह जरूर कहा था कि किसी भी बाहरी हमले की स्थिति में वे एक-दूसरे की रक्षा करेंगे। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले भी संकेत दे चुके हैं कि सऊदी अरब को पाकिस्तान की nuclear umbrella सुरक्षा का समर्थन प्राप्त हो सकता है।
इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कई देशों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह तैनाती केवल सुरक्षा सहयोग है या फिर आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम साबित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो पाकिस्तान की यह भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान एकमात्र ऐसा मुस्लिम परमाणु शक्ति संपन्न देश है जिसकी सैन्य क्षमता को क्षेत्र में गंभीरता से देखा जाता है।
फिलहाल पाकिस्तान और सऊदी अरब की सरकारों ने इस रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खबर ने रणनीतिक हलकों में बहस तेज कर दी है।
