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Trump की नई Middle East रणनीति क्यों मानी जा रही अवास्तविक? Muslim देशों पर Abraham Accords का दबाव बढ़ा

Iran तनाव और fragile ceasefire के बीच Donald Trump की मांग ने बढ़ाई कूटनीतिक हलचल

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Donald Trump की Abraham Accords को लेकर नई मांग ने Middle East की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपनी पुरानी Middle East diplomacy को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनकी वह मांग, जिसमें उन्होंने कई Muslim nations से Abraham Accords में शामिल होने की अपील की है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह रणनीति जमीन पर उतारना बेहद मुश्किल दिखाई देता है। खासकर ऐसे समय में जब Iran और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में संघर्ष विराम (ceasefire) बेहद नाजुक स्थिति में बना हुआ है।

क्या हैं Abraham Accords?

Abraham Accords वह समझौते हैं जिनके तहत कुछ अरब देशों ने Israel के साथ आधिकारिक रिश्ते सामान्य किए थे। यह पहल Trump administration के दौरान शुरू हुई थी और इसे उस समय अमेरिकी कूटनीति की बड़ी सफलता माना गया था।

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United Arab Emirates, Bahrain और कुछ अन्य देशों ने इस समझौते के तहत इजराइल से संबंध स्थापित किए थे।

लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं रहे।

क्यों मुश्किल मानी जा रही Trump की मांग?

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में Middle East की राजनीति बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। Gaza conflict, Iran-Israel tensions और क्षेत्रीय अस्थिरता ने कई मुस्लिम देशों के लिए इजराइल के साथ खुले रिश्तों को राजनीतिक रूप से कठिन बना दिया है।

इसी बीच Donald Trump की ओर से मुस्लिम देशों को Abraham Accords में शामिल होने का सार्वजनिक दबाव नई बहस छेड़ रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बयान उस समय आया जब Tehran के साथ बातचीत जारी थी और कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमले की खबरों ने माहौल और तनावपूर्ण बना दिया।

Iran Factor बना सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पूरे समीकरण में सबसे बड़ा फैक्टर Iran है। कई मुस्लिम देश ईरान के साथ सीधे टकराव से बचना चाहते हैं।

अगर वे खुलकर इजराइल के साथ खड़े होते हैं, तो इससे क्षेत्रीय संतुलन और ज्यादा बिगड़ सकता है। यही वजह है कि कई देश फिलहाल बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रहे हैं।

इसके अलावा घरेलू राजनीति भी एक बड़ा कारण है। कई मुस्लिम देशों में आम जनता का बड़ा हिस्सा Palestinian issue को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकारों पर भी दबाव बना रहता है।

Ceasefire पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान उस समय आए हैं जब क्षेत्र में संघर्ष विराम को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरे West Asia की स्थिरता पर पड़ सकता है।

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इसी कारण कई विश्लेषक मानते हैं कि फिलहाल नए देशों को Abraham Accords में शामिल करवाना आसान नहीं होगा।

Middle East की राजनीति बदल चुकी है

Trump administration के समय जो राजनीतिक माहौल था, वह अब काफी बदल चुका है। उस समय कई देशों ने आर्थिक और रणनीतिक फायदे को ध्यान में रखते हुए समझौते किए थे।

लेकिन अब क्षेत्रीय संघर्ष, सुरक्षा चिंताएं और जनता की भावनाएं पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यही वजह है कि Trump की नई पहल को फिलहाल ज्यादा व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

दुनिया की नजर Middle East पर

मध्य पूर्व की राजनीति का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।

ऐसे में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच Abraham Accords को लेकर उठी नई बहस आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है।

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