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14 पॉइंट्स का सीक्रेट प्लान! क्या अमेरिका-ईरान समझौता रोक देगा मिडिल ईस्ट की जंग?

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा “डील संभव”, जबकि ईरान ने सरेंडर से किया इनकार। 14 बिंदुओं वाले अमेरिकी प्रस्ताव ने दुनिया की निगाहें फिर से मिडिल ईस्ट पर टिका दी हैं।

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US-Iran 14 Point Memo: क्या ट्रंप और ईरान के बीच समझौता मिडिल ईस्ट की जंग रोक पाएगा?
अमेरिका और ईरान के बीच 14-पॉइंट समझौते की चर्चा तेज, मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी।

मिडिल ईस्ट में पिछले तीन महीनों से जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अब एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है। अमेरिका और ईरान के बीच एक “वन-पेज मेमोरेंडम” यानी एक पन्ने के समझौते को लेकर गुप्त बातचीत चल रही है, जिसमें 14 अहम बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौता “बहुत संभव” है। हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत असफल रही तो अमेरिका दोबारा और अधिक तीव्र हमले कर सकता है।

क्या है इस 14-पॉइंट मेमो में?

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह समझौता फिलहाल एक फ्रेमवर्क के रूप में तैयार किया गया है, न कि पूर्ण संधि के तौर पर। इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को रोकना और आगे की विस्तृत परमाणु वार्ताओं के लिए रास्ता तैयार करना है।

इस प्रस्ताव के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन (न्यूक्लियर एनरिचमेंट) पर लंबी रोक लगाने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका 12 से 15 साल तक संवर्धन रोकने की मांग कर रहा है, जबकि ईरान पहले 5 साल के मोरेटोरियम की बात कर चुका है।

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इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और दुनियाभर में फंसे ईरानी अरबों डॉलर के फंड रिलीज करने पर सहमत हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट पर भी बड़ा फैसला

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगी पाबंदियों को कम करने की भी बात शामिल है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। अगर यहां तनाव कम होता है, तो वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।

परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ईरान भविष्य में कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और किसी भी तरह की हथियार-संबंधी गतिविधियों से दूर रहेगा।

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इसके अलावा, ईरान को अपने भूमिगत परमाणु केंद्रों को बंद रखने और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को अचानक जांच की अनुमति देने जैसी शर्तें भी माननी पड़ सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजे। इस सामग्री को अमेरिका या किसी तीसरे देश में ट्रांसफर करने का विकल्प भी चर्चा में है। हालांकि ईरान अब तक इस मांग का विरोध करता रहा है।

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पाकिस्तान और जिनेवा बन सकते हैं बातचीत के केंद्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक आगे की विस्तृत बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद या स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हो सकती है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर समेत कई अधिकारी इस वार्ता में शामिल हैं।

हालांकि अमेरिका के भीतर भी इस बात को लेकर संदेह है कि ईरान की सरकार के अलग-अलग गुट किसी एक फैसले पर सहमत हो पाएंगे या नहीं।

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ट्रंप का सख्त संदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान तय शर्तों को मान लेता है तो युद्ध खत्म हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत टूटती है, तो अमेरिका “और अधिक ताकत और तीव्रता” के साथ कार्रवाई करेगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी कहा कि इतना जटिल समझौता एक दिन में नहीं लिखा जा सकता, लेकिन कूटनीतिक समाधान बेहद जरूरी है।

ईरान ने क्या जवाब दिया?

ईरान ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी योजना की समीक्षा की जा रही है और अंतिम राय मध्यस्थ देश पाकिस्तान को भेजी जाएगी।

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वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका आर्थिक दबाव, नौसैनिक नाकेबंदी और मीडिया प्रचार के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है।

क्या सच में खत्म होगी जंग?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल शुरुआती कदम हो सकता है। अभी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। अगर अंतिम समझौता नहीं हुआ तो क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले 48 घंटों में ईरान क्या जवाब देता है। अगर बातचीत सफल रहती है, तो यह मिडिल ईस्ट में शांति की दिशा में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

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