Health
क्रूज शिप पर फैला खतरनाक Hantavirus क्या इंसानों से इंसानों में फैल सकता है? WHO की नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
अटलांटिक महासागर में MV Hondius क्रूज शिप पर मिले हंटावायरस के Andes स्ट्रेन ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क किया, यह 38 स्ट्रेन्स में अकेला है जो इंसानों में फैल सकता है
दुनियाभर में एक बार फिर एक वायरस को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। इस बार मामला किसी आम फ्लू या कोविड जैसे संक्रमण का नहीं, बल्कि बेहद दुर्लभ और खतरनाक माने जाने वाले Hantavirus का है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius पर हंटावायरस संक्रमण के कई मामले सामने आए, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बड़ा अपडेट जारी किया है।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस आउटब्रेक के पीछे हंटावायरस का “Andes strain” जिम्मेदार है। यह वही स्ट्रेन है जिसे अब तक के 38 अलग-अलग हंटावायरस स्ट्रेन्स में इंसानों से इंसानों में फैलने वाला इकलौता स्ट्रेन माना जाता है।
आखिर क्या है Hantavirus?
हंटावायरस कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसके मामले बेहद कम और गंभीर होते हैं। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों, चूहों जैसी प्रजातियों और जंगली कृन्तकों (rodents) के जरिए फैलता है। संक्रमित जानवरों की लार, पेशाब या मल के संपर्क में आने से इंसानों में संक्रमण हो सकता है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस आमतौर पर ग्रामीण इलाकों, जंगलों या उन जगहों पर ज्यादा पाया जाता है जहां इंसानों और जंगली कृन्तकों का संपर्क बढ़ जाता है।
क्यों खास है Andes स्ट्रेन?
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री Aaron Motsoaledi ने संसद समिति को बताया कि शुरुआती जांच में यह साफ हो चुका है कि क्रूज शिप पर मिला वायरस Andes strain है।
उन्होंने कहा कि 38 अलग-अलग स्ट्रेन्स में से केवल यही एक ऐसा प्रकार है जिसमें इंसानों से इंसानों में संक्रमण फैलने की क्षमता पाई गई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा संक्रमण बेहद दुर्लभ है और केवल बहुत करीबी संपर्क में आने पर ही फैलता है।
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यानी यह वायरस कोविड-19 या सामान्य फ्लू की तरह हवा में तेजी से फैलने वाला संक्रमण नहीं माना जाता।
कैसे फैलता है यह वायरस?
विशेषज्ञ बताते हैं कि हंटावायरस आमतौर पर संक्रमित कृन्तकों के संपर्क से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति ऐसी जगह साफ करता है जहां चूहों का मल या पेशाब मौजूद हो, तो वायरस हवा में मौजूद छोटे कणों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है।
हालांकि Andes strain को लेकर वैज्ञानिक ज्यादा सतर्क हैं क्योंकि इसमें सीमित स्तर पर मानव-से-मानव संक्रमण की पुष्टि पहले भी हो चुकी है।

1993 में पहली बार दुनिया का ध्यान गया
हंटावायरस पहली बार वैश्विक सुर्खियों में तब आया था जब 1993 में अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में इसके कई मामले सामने आए थे। इसके बाद यूरोप और एशिया के अलग-अलग देशों में भी इसके कुछ प्रकार पाए गए।
हालांकि अच्छी बात यह है कि यह वायरस शरीर के बाहर ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाता। सीधी धूप और सामान्य केमिकल डिसइन्फेक्टेंट्स के संपर्क में आने पर यह जल्दी नष्ट हो जाता है।
क्या लोगों को डरने की जरूरत है?
फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर रखनी चाहिए। खासकर उन जगहों पर जहां चूहों की संख्या ज्यादा हो या सफाई की कमी हो।
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डॉक्टरों के मुताबिक तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
WHO की निगरानी जारी
WHO और दक्षिण अफ्रीका की स्वास्थ्य एजेंसियां अब इस बात पर नजर रख रही हैं कि क्रूज शिप से जुड़े संक्रमण के मामले कितनी तेजी से बढ़ते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण कितने लोगों तक पहुंचा है, लेकिन Andes strain की पुष्टि ने मेडिकल समुदाय को सतर्क जरूर कर दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला दुनिया को एक बार फिर यह याद दिलाता है कि जंगली जानवरों से जुड़े वायरस भविष्य में भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।
