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Larijani की हत्या के बाद भी Iran कह रहा है “हमारी रक्षा नहीं टूटेगी।” पर क्यों?

Supreme Leader से लेकर Security Chief तक — Iran के शीर्ष नेता एक-एक करके मारे जा रहे हैं। फिर भी Tehran की व्यवस्था डटी है। जानिए Iran की उस ‘Mosaic Defence’ रणनीति के बारे में जो इसे तोड़ना इतना मुश्किल बनाती है।

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Ali Larijani की हत्या के बाद भी Iran ने कहा कि उसकी रक्षा व्यवस्था अटूट है। 'Mosaic Defence' सिद्धांत पर टिकी Iran की सैन्य रणनीति नेताओं के मारे जाने के बावजूद काम करती रहती है।
Ali Larijani की हत्या के बाद भी Iran ने कहा कि उसकी रक्षा व्यवस्था अटूट है। 'Mosaic Defence' सिद्धांत पर टिकी Iran की सैन्य रणनीति नेताओं के मारे जाने के बावजूद काम करती रहती है।

कल्पना करें कि एक बड़ी कंपनी के CEO, CFO और Head of Security — तीनों को एक महीने में मार दिया जाए। सामान्य समझ कहती है कि कंपनी बिखर जाएगी। लेकिन अगर वह कंपनी पहले से ही इसी के लिए तैयार हो — हर विभाग स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम हो — तो? यही Iran की कहानी है।

Larijani की मौत — एक बड़ा झटका

Ali Larijani को Iran के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता था। Supreme Leader Ali Khamenei की मौत के बाद वही de facto रूप से Iran का नेतृत्व कर रहे थे। वह Khamenei के सुरक्षा निकायों के मुख्य समन्वयक थे।

47 साल के राजनीतिक करियर में Larijani ने IRGC, State Media, Parliament Speaker और Nuclear Negotiator तक हर बड़ा पद संभाला था। “केवल राष्ट्रपति का पद ही उनके CV में नहीं था” — यही उनकी खासियत थी।

Larijani की हत्या Supreme Leader Khamenei की मौत के बाद से Iran की सबसे बड़ी क्षति है। वह Israel के हमलों के बावजूद 13 मार्च को Tehran की सड़कों पर Quds Day rally में चले थे — खुलेआम, जानते हुए कि वह निशाने पर हैं।

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Iran का जवाब — “व्यवस्था किसी एक पर नहीं टिकी”

Iran के Foreign Minister Abbas Araghchi ने साफ कहा — “मैं नहीं जानता कि America और Israel अभी तक यह क्यों नहीं समझ पाए कि Islamic Republic किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। हमारे पास एक मजबूत राजनीतिक ढांचा है।” उन्होंने कहा कि Supreme Leader तक शहीद हो गए, फिर भी व्यवस्था चलती रही।

यह सिर्फ बयानबाजी नहीं — इसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति है।

‘Mosaic Defence’ — वो रणनीति जो Iran को तोड़ना मुश्किल बनाती है

Iran की सैन्य रणनीति “Mosaic Defence Doctrine” पर टिकी है — एक विकेंद्रीकृत सैन्य ढांचा जो यह सुनिश्चित करता है कि शीर्ष नेताओं के मारे जाने पर भी सैन्य अभियान जारी रहें। इस सिद्धांत के तहत विभिन्न इकाइयाँ स्वतंत्र रूप से काम कर सकती हैं लेकिन समन्वित रहती हैं — जिससे दुश्मन के लिए नेतृत्व हमलों से पूरी सेना को पंगु बनाना लगभग असंभव हो जाता है।

इसे ऐसे समझें — अगर एक मधुमक्खी के छत्ते की रानी को मार दिया जाए तो छत्ता बिखर जाता है। लेकिन अगर हर मधुमक्खी को पहले से सिखाया गया हो कि रानी के बिना भी काम कैसे करना है — तो छत्ता जीवित रहता है। Iran ने दशकों से यही सिखाया है।

दोहरी सैन्य शक्ति — Regular Army और IRGC

Iran की ताकत का एक बड़ा राज उसकी दोहरी सैन्य संरचना है। सरकार की रक्षा सिर्फ नियमित सेना (Artesh) नहीं करती — बल्कि IRGC यानी Islamic Revolutionary Guard Corps भी करती है, जो संवैधानिक रूप से Iran की शासन व्यवस्था की रक्षा के लिए बनाई गई है।

Ali Larijani — Iran के वो अनुभवी कूटनीतिज्ञ और सुरक्षा प्रमुख जो America और Iran के बीच बातचीत की एकमात्र कड़ी थे। उनकी हत्या के बाद अब Tehran में शांति की बात करने वाला कोई नहीं बचा।


एक पूर्व US Defense Deputy ने साफ कहा — “केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन नहीं होता। जब तक बोलने वाला कोई जिंदा है, सरकार जिंदा है।”

Hamas और Hezbollah का उदाहरण

Iran के proxy संगठन Hamas और Hezbollah — दोनों पर Israel ने कई बड़े decapitation strikes किए हैं। लेकिन दोनों अभी भी काम कर रहे हैं। यही Iran की असली ताकत है — एक ऐसा ढांचा जो नेताओं के मरने के बाद भी खड़ा रहता है।

पर असली सवाल यह है — कब तक?

विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। एक वर्ग मानता है कि Iran का ढांचा लंबे समय तक टिक सकता है। दूसरे वर्ग का मानना है कि Larijani की मौत ने Iran के उस वर्ग को हिम्मत दी है जो सरकार बदलना चाहता है।

Iran के अधिकारी अब इस युद्ध को “पादरियों की रक्षा” की जगह “Iran की भौगोलिक अखंडता की रक्षा” के रूप में पेश कर रहे हैं — ताकि धर्मनिरपेक्ष ईरानी भी उनके साथ खड़े हों।

Supreme Leader मारे गए। Security Chief मारे गए। Intelligence Minister मारे गए। Basij Commander मारे गए। और Iran अभी भी मिसाइलें दाग रहा है, Hormuz बंद रखे है और दुनिया को चुनौती दे रहा है। यह या तो असाधारण ताकत है — या असाधारण हठ। शायद दोनों।