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ईरान का UAE पर बड़ा आरोप! कहा “हमले में सीधे शामिल था अबू धाबी”

BRICS Summit के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने UAE पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इज़राइल हमलों में यूएई ने सक्रिय भूमिका निभाई और शुरुआत में हमले की निंदा तक नहीं की।

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BRICS Summit के दौरान मीडिया से बातचीत करते ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Abbas Araghchi ने संयुक्त अरब अमीरात यानी United Arab Emirates पर बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। भारत में आयोजित BRICS Summit में शामिल होने पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यूएई अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों में “सक्रिय साझेदार” था।

अराघची ने अपने Telegram पोस्ट में कहा,
“UAE इस आक्रामक कार्रवाई में एक्टिव पार्टनर था और इसमें कोई शक नहीं है।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और खाड़ी देशों के बीच रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है।

“हमले की निंदा तक नहीं की”

ईरानी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि जब अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमले शुरू हुए, तब यूएई ने उसकी निंदा तक नहीं की।

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उन्होंने कहा कि बाद में यह भी साफ हो गया कि यूएई इन हमलों में शामिल था और संभव है कि उसने सीधे तौर पर भी कार्रवाई की हो।

अराघची के इस बयान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, यूएई की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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‘सीक्रेट मीटिंग’ का भी जिक्र

अराघची ने अपने बयान में उस कथित “Secret Meeting” का भी जिक्र किया, जिसका दावा इज़राइल की ओर से किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध के दौरान इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और यूएई के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan के बीच एक गुप्त मुलाकात हुई थी।

हालांकि अबू धाबी ने इस तरह की किसी भी बैठक से साफ इनकार किया है। लेकिन ईरान इस कथित मुलाकात को अपने खिलाफ बनी रणनीति का हिस्सा मान रहा है।

ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों में बढ़ी कड़वाहट

28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। इसमें कुछ खाड़ी देशों के ठिकानों पर भी हमले हुए थे।

इसी के बाद से ईरान और यूएई समेत कई Gulf Nations के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया। हालांकि 8 अप्रैल से एक नाजुक Ceasefire लागू है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे।

ईरान लगातार आरोप लगाता रहा है कि खाड़ी देशों ने अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिकी सेनाओं को हमले के लिए करने दिया।

दूसरी तरफ यूएई और अन्य खाड़ी देश इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने दिया।

पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था तक पर इसका असर पड़ सकता है।

भारत समेत कई देश इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा केंद्र माना जाता है।

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