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ईरान के लड़ाकू विमानों को शरण देता रहा पाकिस्तान वायरल वीडियो ने खोली ‘मध्यस्थ’ की पोल

कराची एयरपोर्ट पर दिखे ईरानी सैन्य विमान, रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान की निष्पक्षता पर उठने लगे सवाल

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कराची एयरपोर्ट पर दिखे ईरानी सैन्य विमानों के वीडियो के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर नए सवाल उठने लगे हैं।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट और वायरल वीडियो ने ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनसे इस्लामाबाद की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान लंबे समय से ईरान के सैन्य विमानों को अपने यहां शरण देता रहा है, खासकर तब जब Tehran किसी बड़े संघर्ष का सामना कर रहा होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ऑनलाइन वीडियो में Karachi Airportर ईरानी सैन्य विमान और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो जुलाई 2025 का बताया जा रहा है और इसमें ऐसे विमान नजर आए जिन्हें ईरान की सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

यह मामला उस वक्त और ज्यादा चर्चा में आ गया जब अमेरिकी मीडिया संस्था CBS News ने दावा किया कि पाकिस्तान फिलहाल भी ईरानी विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह स्थिति पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ वाली छवि पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि हाल ही में Tehran और Washington के बीच शांति वार्ता में पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा था।

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वीडियो ने बढ़ाई हलचल

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में ईरानी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और रिफ्यूलिंग टैंकर खुले तौर पर एयरपोर्ट के रनवे के पास दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो उस समय का है जब इजरायल ने Operation Rising Lion चलाकर ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश के सैन्य विमानों को दूसरे देश में लंबे समय तक खड़ा रखना सिर्फ तकनीकी सहयोग नहीं बल्कि रणनीतिक समर्थन का संकेत भी हो सकता है।

हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन रिपोर्ट्स को खारिज किया है। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि CBS News की रिपोर्ट “भ्रामक और सनसनीखेज” है। पाकिस्तान ने सीधे तौर पर विमानों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया, लेकिन रिपोर्ट की प्रस्तुति पर सवाल उठाए।

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मध्यस्थ या सहयोगी?

इस पूरे मामले ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने वाला देश बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरानी सैन्य विमानों की मौजूदगी उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर कोई देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ बनना चाहता है, तो उसे पूरी तरह संतुलित दिखना जरूरी होता है। लेकिन इस तरह की खबरें उस भरोसे को कमजोर कर सकती हैं।

पहले भी रहे हैं करीबी संबंध

ईरान और पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा पूरी तरह आसान नहीं रहे, लेकिन कई मौकों पर दोनों देशों ने एक-दूसरे का साथ भी दिया है। सीमा सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय राजनीति जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से संपर्क बना हुआ है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए ईरान के साथ रिश्ते संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।

दुनिया की नजर अब पाकिस्तान पर

इस रिपोर्ट और वीडियो के सामने आने के बाद अब दुनिया की नजर पाकिस्तान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज है। कुछ लोग पाकिस्तान पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि यह सिर्फ सैन्य सहयोग का हिस्सा हो सकता है।

लेकिन इतना तय है कि वायरल वीडियो ने पाकिस्तान की “निष्पक्ष मध्यस्थ” वाली छवि को बड़ी चुनौती जरूर दे दी है।

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