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रूस की खुफिया सूचना से NIA ने अमेरिकी नागरिक VanDyke और 6 यूक्रेनी को दबोचा — Myanmar में दे रहे थे ड्रोन ट्रेनिंग

2024 से म्यांमार में घुसपैठ, ड्रोन और जैमिंग उपकरण की सप्लाई — दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से हुई गिरफ्तारी, NIA कस्टडी में 27 मार्च तक

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NIA ने दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिक Mathew VanDyke और 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया — रूसी खुफिया सूचना से मिला था सुराग।
NIA ने दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिक Mathew VanDyke और 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया — रूसी खुफिया सूचना से मिला था सुराग।

एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को हिला कर रख दिया है। National Investigation Agency यानी NIA ने 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के एयरपोर्ट पर इन सातों को गिरफ्तार किया। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन की नींव रखी थी — रूस की खुफिया सूचना ने।

रूस ने दी थी टिप-ऑफ

मामले से परिचित सूत्रों के मुताबिक रूसी खुफिया एजेंसियों ने अपने भारतीय समकक्षों के साथ इन सात लोगों की गतिविधियों की जानकारी साझा की थी। इसी सूचना के आधार पर NIA की टीमें पिछले करीब तीन महीनों से पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय थीं और इन संदिग्धों पर नज़र रख रही थीं। हालांकि सूत्रों ने रूस द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के विवरण और उसकी भूमिका की सीमा के बारे में कुछ भी बताने से इनकार किया।

कौन है Mathew Aaron VanDyke?

गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक का नाम है Mathew Aaron VanDyke, जो Baltimore का रहने वाला है। अपनी वेबसाइट के अनुसार VanDyke ने CIA में शामिल होने की कोशिश की थी, जो नाकाम रही। इसके बाद उसने खुद को एक सैनिक, अंतरराष्ट्रीय व्यापारी और युद्ध संवाददाता के रूप में पेश किया। वह “Sons of Liberty International” नाम की एक मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म का संस्थापक भी बताया जाता है।

उसके साथ जो छह यूक्रेनी नागरिक पकड़े गए उनके नाम हैं — Maksym Honcharuk, Petro Hubra, Sukmanovskyi Ivan, Stefankiv Marian, Slyviak Taras और Kaminskyi Viktor। दिल्ली की एक अदालत ने इन सभी सातों को 27 मार्च तक NIA की हिरासत में भेज दिया है।

क्या कर रहे थे ये लोग?

NIA के मुताबिक ये सभी टूरिस्ट वीज़ा पर अलग-अलग तारीखों में भारत आए, गुवाहाटी तक उड़ान भरी और फिर बिना ज़रूरी परमिट — Restricted Area Permit (RAP) या Protected Area Permit (PAP) — के मिज़ोरम पहुंचे। वहां से इन्होंने म्यांमार में अवैध रूप से प्रवेश किया।

NIA का आरोप है कि ये लोग म्यांमार के ethnic armed groups को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग दे रहे थे — वो भी उन गुटों को जो भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों से जुड़े बताए जाते हैं। इतना ही नहीं, NIA ने दावा किया है कि इन लोगों ने यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार तक ड्रोन की “बड़ी खेप” भी तस्करी की।

NIA ने अदालत में बताया कि पूछताछ के दौरान VanDyke और सभी छह यूक्रेनी नागरिकों ने माना कि उन्होंने एक से ज़्यादा बार म्यांमार के सशस्त्र गुटों को ट्रेनिंग दी।

14 में से 8 अभी भी लापता

छह यूक्रेनी नागरिक दरअसल एक बड़े 14 सदस्यीय दल का हिस्सा बताए जाते हैं जो म्यांमार गया था। इनमें से 6 तो गिरफ्त में आ गए, लेकिन बाकी 8 के बारे में अभी जांच चल रही है। अधिकारियों को अभी पता नहीं है कि वे अभी भी म्यांमार में हैं या भारत के रास्ते निकल चुके हैं।

NIA ने दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर अमेरिकी नागरिक Mathew VanDyke और 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया — रूसी खुफिया सूचना से मिला था सुराग।


यूक्रेन और अमेरिका की प्रतिक्रिया

यूक्रेनी राजदूत Oleksandr Polishchuk ने कहा कि उनका देश इस मामले में जांच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन यह प्रक्रिया “निष्पक्ष और पारदर्शी” होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यूक्रेनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए और 2003 की mutual legal assistance treaty के तहत काम हो।

यूक्रेनी पक्ष को इस बात की चिंता है कि क्या गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उनके नागरिकों को जज के सामने पेश किया गया, और क्या उन्हें यूक्रेनी भाषा में आरोपों की जानकारी दी गई। कांसुलर एक्सेस भी अब तक नहीं दिया गया है।

वहीं अमेरिकी दूतावास ने केवल इतना कहा कि वह मामले से “वाकिफ” है। अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने बुधवार को NSA Ajit Doval के साथ बैठक का ज़िक्र किया, लेकिन VanDyke के मामले पर कुछ नहीं बोले।

मिज़ोरम से उठा था संकेत

यह मामला नया नहीं है। मिज़ोरम के मुख्यमंत्री Lalduhoma ने मार्च 2025 में राज्य विधानसभा में खुलासा किया था कि जून से दिसंबर 2024 के बीच करीब 2,000 विदेशी नागरिक मिज़ोरम आए — जिनमें से कई पर्यटक नहीं थे और चुपचाप राज्य से निकल गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि UK और US के नागरिक म्यांमार में घुसकर वहां उग्रवादियों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे।

यह मामला भारत की पूर्वोत्तर सीमा की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है — और यह भी बताता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन साधना कितना मुश्किल होता जा रहा है।