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Larijani की हत्या के बाद Tehran में America से बात कौन करेगा? Iran खो चुका है अपना सबसे अहम ‘डिप्लोमेट-योद्धा’
Ali Larijani वो इंसान थे जो एक हाथ में Immanuel Kant की किताब और दूसरे में IRGC की रणनीति लेकर चलते थे। उनकी मौत ने Iran और America के बीच बातचीत का वो आखिरी दरवाजा भी बंद कर दिया जो थोड़ा-सा खुला था।
किसी भी युद्ध में दो चीजें होती हैं — एक बम और दूसरी बातचीत। जब बम चलते हैं तब भी पर्दे के पीछे कोई न कोई बातचीत की गुंजाइश रखता है। Ali Larijani वही इंसान थे जो Iran की तरफ से यह काम करते थे। अब वो नहीं रहे — और दुनिया पूछ रही है कि अब क्या?
Larijani — किताबें भी, मिसाइलें भी
Larijani ने 1979 में Sharif University of Technology से Mathematics और Computer Science में डिग्री ली थी। बाद में University of Tehran से Western Philosophy में PhD की और जर्मन दार्शनिक Immanuel Kant पर शोध लिखा। लेकिन यही शख्स Iran-Iraq युद्ध में IRGC में Brigadier General भी रहा। यह संयोजन दुर्लभ था — एक ऐसा नेता जो दुनिया की भाषा भी समझता था और Iran की ताकत की भाषा भी।
युद्ध शुरू होने से ठीक पहले Larijani Oman, Moscow और Gulf देशों के दौरे पर थे। उन्होंने Russian President Vladimir Putin से मुलाकात की और Iran के परमाणु समझौते की शर्तें रखीं। यानी वह Iran की “बाहरी आवाज” थे — एकमात्र ऐसा चेहरा जिसे दुनिया सुनती थी।
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वो बातचीत जो हो सकती थी — पर नहीं हुई
युद्ध से कुछ हफ्ते पहले Larijani Oman की मध्यस्थता में America के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में लगे थे। Al Jazeera को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि Iran की स्थिति “सकारात्मक” है और “बातचीत एक तर्कसंगत रास्ता है।”
लेकिन जब Wall Street Journal ने खबर छापी कि Larijani ने Oman के जरिए America के साथ परमाणु वार्ता फिर शुरू करने का दबाव बनाया, तो Larijani ने खुद X पर लिखा — “हम America से बातचीत नहीं करेंगे।”यह बयान उनकी मुश्किल स्थिति दिखाता है — एक तरफ कूटनीति का रास्ता, दूसरी तरफ Iran के अंदर की कट्टरपंथी ताकतें।
Israel ने जानबूझकर “दरवाजा” बंद किया?
Bloomberg के विश्लेषकों के अनुसार Larijani की हत्या से Iran की युद्धकालीन नेतृत्व व्यवस्था काफी हद तक कट्टरपंथियों के हाथ में चली गई है जो कूटनीतिक रास्ते की तलाश कम करेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि Israel ने Larijani को मारकर जानबूझकर युद्ध खत्म करने के कूटनीतिक रास्ते बंद किए हो सकते हैं।यह ऐसा ही है जैसे Cricket match में एकमात्र अनुभवी batsman को पहले over में ही आउट कर दिया जाए — टीम लड़ती रहेगी, लेकिन समझदारी से नहीं।

अब Tehran में America से बात कौन करेगा?
Larijani की मौत के बाद Iran की सत्ता में Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf का रुतबा बढ़ने की संभावना है। Ghalibaf IRGC से गहरे जुड़े हैं और विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए जाने जाते हैं। वह Mojtaba Khamenei को Supreme Leader बनाने के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे।
Larijani के बिना Iran की नेतृत्व व्यवस्था अब बिखरी हुई है। कोई एक इंसान नहीं बचा जो सभी धड़ों का प्रतिनिधित्व कर सके, आंतरिक सहमति बना सके और जो वादा करे उसे पूरा करा सके। यह कूटनीति को और नाजुक बनाता है।
Iran का जवाब — बातचीत नहीं, बम
Iran के IRGC ने Larijani की मौत का बदला लेते हुए Israel के 100 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया। Baghdad में US Embassy के पास भी ड्रोन हमले हुए।
Larijani की हत्या की खबर फैलते ही Iran के अफसरों में यह डर फैल गया कि Israel तब तक नहीं रुकेगा जब तक Iran की पूरी नेतृत्व व्यवस्था खत्म न हो जाए।
एक तरफ ऐसा नेता जो Kant पढ़ता था और दूसरे देशों की राजधानियों में बातचीत करता था — दूसरी तरफ एक मिसाइल जिसने उसे उसके बेटे समेत खत्म कर दिया। अब Tehran में America से बात करने वाला कोई नहीं बचा। और शायद यही Israel और America का असली मकसद था।
