World News
Donald Trump का बड़ा दावा इज़राइल-लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर ऐलान लेकिन ‘10वीं जंग रोकने’ वाले बयान पर उठे सवाल
वॉशिंगटन में 34 साल बाद बातचीत, 6 घंटे में लागू होगा युद्धविराम; हिज़्बुल्लाह नेता ने कहा—यह ‘गंभीर गलती’
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि यह युद्धविराम दोनों देशों के बीच शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से “बेहद सकारात्मक और सफल बातचीत” की है। उनके मुताबिक, दोनों नेताओं ने शांति के लिए सहमति जताई है और तय किया है कि 10 दिनों का युद्धविराम लागू किया जाएगा।
6 घंटे में लागू होगा सीजफायर
ट्रंप के अनुसार, यह सीजफायर अमेरिकी समयानुसार शाम 5 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे) से लागू हो जाएगा। उन्होंने इसे एक बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में रास्ता खुलेगा।
और भी पढ़ें : तमिलनाडु भगदड़ केस में बड़ा मोड़ क्यों CBI ने विजय को भेजा नोटिस… 12 जनवरी को पेशी तय
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “यह मेरा सौभाग्य रहा है कि मैंने दुनिया भर में 9 युद्धों को खत्म कराया है, और यह मेरा 10वां प्रयास है।” हालांकि उनके इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस भी छिड़ गई है।
34 साल बाद आमने-सामने बातचीत
इस घटनाक्रम की सबसे खास बात यह है कि इज़राइल और लेबनान के बीच लगभग 34 वर्षों बाद सीधी बातचीत हुई है। वॉशिंगटन डीसी में हुई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले दोनों देशों के बीच संवाद लगभग ठप था।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने इस वार्ता को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ट्रंप ने अपने सहयोगियों—उप राष्ट्रपति JD Vance, विदेश मंत्री Marco Rubio और सैन्य नेतृत्व को निर्देश दिए हैं कि इस समझौते को “स्थायी शांति” में बदला जाए।

व्हाइट हाउस में हो सकती है बड़ी बैठक
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही नेतन्याहू और औन को व्हाइट हाउस में आमंत्रित करेंगे। यह बैठक 1983 के बाद पहली “महत्वपूर्ण शांति वार्ता” मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बैठक सफल रहती है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
हिज़्बुल्लाह का विरोध
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लेबनान के अंदर विरोध भी देखने को मिल रहा है। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के सांसद Hussein Hajj Hassan ने इस बातचीत को “गंभीर गलती” करार दिया है।
उन्होंने कहा कि “दुश्मन के साथ सीधी बातचीत करना न सिर्फ गलत है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक जोखिम भी है।” उनके अनुसार, लेबनान सरकार ने अमेरिका और इज़राइल के दबाव में आकर यह फैसला लिया है।
क्या सच में आएगी स्थायी शांति?
मध्य पूर्व के जानकारों का कहना है कि यह सीजफायर भले ही अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
पिछले एक महीने से इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष ने क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। ऐसे में यह युद्धविराम आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आ सकता है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर मतभेद अभी भी गहरे हैं।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह कदम जहां एक ओर शांति की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके दावों और इस समझौते की स्थिरता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 10 दिन का सीजफायर स्थायी समाधान की शुरुआत बन पाएगा या फिर यह भी अस्थायी राहत तक ही सीमित रहेगा।
