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Strait of Hormuz में तनाव चरम पर: अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद सुपरटैंकरों की एंट्री

ब्लॉकेड के बीच तेल जहाजों की आवाजाही जारी, ईरान-अमेरिका तनाव ने फिर पकड़ी रफ्तार

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होर्मुज़ स्ट्रेट में बढ़ता तनाव, प्रतिबंधों के बावजूद सुपरटैंकरों की आवाजाही जारी

मध्य-पूर्व में एक बार फिर समुद्री रास्तों को लेकर तनाव गहरा गया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए सख्त प्रतिबंधों और ब्लॉकेड के बावजूद दो बड़े सुपरटैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत आने वाला एक बहुत बड़ा तेल टैंकर बिना किसी बाधा के इस संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरा है। यह वही क्षेत्र है जो दुनिया के बड़े हिस्से के कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद में हुई असफल शांति वार्ता के बाद ईरान पर नए ब्लॉकेड की घोषणा की थी। इन वार्ताओं का मकसद ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करना था, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा है कि अब तक लगभग 10 जहाजों को वापस लौटाया गया है और कोई भी जहाज आधिकारिक ब्लॉकेड को तोड़ नहीं पाया है। इसके बावजूद कुछ टैंकरों की एंट्री ने हालात को और जटिल बना दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक खाली सुपरटैंकर “RHN” और एक अन्य टैंकर “Alicia” स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुजर चुके हैं। इनमें से एक जहाज इराक की ओर बढ़ रहा है, जबकि दूसरे की दिशा अभी स्पष्ट नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों टैंकर पहले भी ईरानी तेल परिवहन से जुड़े रहे हैं।

ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर बातचीत सफल होती है तो हो सकता है कि कुछ शर्तों के साथ होर्मुज़ के ओमानी हिस्से से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाए।

strait of hormuz 2


इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी दिख सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ईरान पर दबाव बढ़े, लेकिन वह फिलहाल अपने उत्पादन को बनाए रखने में सक्षम है और स्टोरेज क्षमता के जरिए कुछ हफ्तों तक सप्लाई जारी रख सकता है।

तेल की दुनिया में यह स्थिति कुछ वैसी है जैसे किसी व्यस्त हाईवे पर ट्रैफिक रोकने की कोशिश की जाए, लेकिन कुछ वाहन अलग रास्तों या वैकल्पिक मार्गों से आगे बढ़ते रहें—जिससे नियंत्रण और भी मुश्किल हो जाए।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव शांत होता है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार को और अधिक अस्थिरता की ओर धकेलता है।

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