World News
सीजफायर खत्म होने से पहले ईरान का बड़ा बयान, अमेरिका से समझौता अभी दूर
“अभी कई मतभेद बाकी”—ईरानी संसद अध्यक्ष ने शांति वार्ता पर दिया साफ संकेत
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। दो हफ्तों के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के खत्म होने से ठीक पहले ईरान ने साफ कर दिया है कि अभी अंतिम समझौता काफी दूर है।
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने एक टीवी संबोधन में कहा कि बातचीत में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।
“अभी फाइनल डील से दूर हैं”
अपने संबोधन में ग़ालिबाफ ने कहा,
“हम अभी अंतिम चर्चा से काफी दूर हैं। कई बुनियादी मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के पहले दौर में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है।
और भी पढ़ें : मिडिल ईस्ट में शांति का नया फॉर्मूला: Xi Jinping का 4-पॉइंट प्लान, दुनिया की बढ़ी नजरें
पाकिस्तान में हुई थी पहली बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का पहला दौर हाल ही में Pakistan में आयोजित किया गया था। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और युद्ध को रोकने के लिए संभावित समाधान पर चर्चा की।
हालांकि, इन बैठकों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है।
ईरान का दावा—“हम मैदान में जीते”
ईरानी संसद अध्यक्ष ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष में ईरान ने “मैदान में जीत” हासिल की है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा, जबकि ईरान ने अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखा।
क्यों माना सीजफायर?
ग़ालिबाफ के मुताबिक, ईरान ने सीजफायर इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उसकी कई मांगों को अमेरिका ने मान लिया था।
“अगर हमने युद्धविराम स्वीकार किया, तो इसलिए कि उन्होंने हमारी शर्तें मानीं,” उन्होंने कहा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
इस पूरे विवाद में Strait of Hormuz की भूमिका बेहद अहम है।
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान का दावा है कि इस क्षेत्र पर उसका नियंत्रण मजबूत है और यही उसकी रणनीतिक ताकत है।
सीजफायर खत्म होने का क्या असर?
अमेरिका और ईरान के बीच यह अस्थायी सीजफायर बुधवार को खत्म होने वाला है। ऐसे में अगर कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वार्ता विफल रहती है, तो इसका असर न सिर्फ मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा—खासतौर पर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर।
आगे का रास्ता
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि रास्ता आसान नहीं है।
दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई बड़ा समझौता होता है या फिर यह तनाव एक बार फिर खुली टकराव की ओर बढ़ता है।
