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ईरान पहुंचते ही एक्टिव हुए Asim Muni! क्या Donald Trump का ‘शांति फॉर्मूला’ बदल देगा युद्ध का रुख?
इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के बाद पाकिस्तान की नई पहल, अमेरिका-ईरान के बीच फिर शुरू होगी बातचीत
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीति तेज होती नजर आ रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अचानक तेहरान पहुंच गए हैं, जहां वे अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही और दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके।
पाकिस्तान बना ‘पावरफुल मिडिएटर’
पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और असीम मुनीर की जोड़ी लगातार कोशिश कर रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रहे।
पाकिस्तान की खासियत यह है कि उसके रिश्ते एक साथ कई बड़े देशों—जैसे सऊदी अरब और चीन—से अच्छे हैं। यही वजह है कि वह इन देशों के बीच ‘ब्रिज’ बनने की कोशिश कर रहा है।
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ट्रंप का शांति प्रस्ताव फिर चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव भी चर्चा में है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इसी प्रस्ताव के आधार पर नई बातचीत शुरू कराने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस प्रस्ताव में क्या शर्तें शामिल हैं, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे ‘संभावित ब्रेकथ्रू’ के तौर पर देखा जा रहा है।
तेहरान में हाई-लेवल मीटिंग
असीम मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी इस दौरे पर मौजूद हैं। तेहरान पहुंचने पर उनका स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया।
यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे अगले दौर की वार्ता की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
युद्धविराम की समयसीमा और बढ़ता दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, जिसकी समयसीमा अगले हफ्ते खत्म होने वाली है। ऐसे में दोनों देशों पर दबाव है कि वे जल्द से जल्द कोई स्थायी समाधान निकालें।
पिछले सात हफ्तों में इस संघर्ष ने हजारों लोगों की जान ली है और वैश्विक स्तर पर तेल बाजार को भी हिला दिया है। महंगाई बढ़ने का खतरा भी लगातार बना हुआ है।

व्हाइट हाउस ने भी सराहा पाकिस्तान का रोल
व्हाइट हाउस ने भी पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर तारीफ की है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस्लामाबाद ने बातचीत के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है।
यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पाकिस्तान की भूमिका और भी अहम हो सकती है।
क्या टल पाएगा बड़ा युद्ध?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। अगर बातचीत सफल होती है, तो यह न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर होगी।
लेकिन अगर यह प्रयास भी विफल होता है, तो स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है।
आगे की राह
अब सभी की नजर तेहरान में चल रही इन बैठकों पर है। क्या पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति ला पाएगी?
या फिर यह संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले लेगा—यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।
