Connect with us

World News

Donald Trump का बड़ा दावा, ‘हमेशा खुला रहेगा होर्मुज जलडमरूमध्य’—चीन को बताया सबसे ज्यादा खुश

डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बढ़ी वैश्विक हलचल, चीन-ईरान रिश्तों और तेल सप्लाई पर उठे नए सवाल

Published

on

Trump on Strait of Hormuz: चीन क्यों खुश? जानिए पूरा मामला
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा, चीन और ईरान पर बढ़ी चर्चा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का एक बयान वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। ट्रंप ने दावा किया है कि वह रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz को “स्थायी रूप से खुला” रख रहे हैं और इससे चीन सबसे ज्यादा खुश है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यह जलडमरूमध्य अब कभी बंद नहीं होगा और वह यह कदम सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि दुनिया और खासतौर पर चीन के हित में उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन ने ईरान को हथियार न देने पर सहमति जताई है।

हालांकि, ट्रंप के इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने बार-बार इन आरोपों को खारिज किया है कि वह ईरान को किसी तरह की सैन्य सहायता दे रहा है। लेकिन दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

और भी पढ़ें : तमिलनाडु भगदड़ केस में बड़ा मोड़ क्यों CBI ने विजय को भेजा नोटिस… 12 जनवरी को पेशी तय

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। वहीं यह भी सामने आया है कि ईरान कथित तौर पर चीनी जासूसी सैटेलाइट्स का इस्तेमाल कर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की लोकेशन ट्रैक कर रहा है।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक कच्चे तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग के खुले रहने या बंद होने का असर सीधे-सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ता है।

Trump on Strait of Hormuz: चीन क्यों खुश? जानिए पूरा मामला


विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है, जिसका मकसद अमेरिका की रणनीतिक ताकत दिखाना और चीन को एक अलग संकेत देना है। वहीं कुछ जानकार इसे अमेरिका-चीन-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के रूप में भी देख रहे हैं।

भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद अहम है, क्योंकि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करती हैं। अगर यहां कोई भी अस्थिरता आती है, तो इसका असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व की राजनीति सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा हिस्सा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान के बाद अमेरिका, चीन और ईरान के बीच रिश्तों में क्या नया मोड़ आता है।