World News
‘न्यूक्लियर डस्ट’ क्या है? Donald Trump के दावे से फिर गरमाई अमेरिका-ईरान परमाणु बहस
ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर उठे सवाल, ट्रंप बोले—अमेरिका हटाएगा “छिपा हुआ परमाणु पदार्थ”
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा परमाणु विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का केंद्र बना है “न्यूक्लियर डस्ट”—एक ऐसा शब्द जिसका इस्तेमाल अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में किया और जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। उन्होंने इस संवर्धित यूरेनियम को “न्यूक्लियर डस्ट” कहा, जो कथित तौर पर जमीन के अंदर गहराई में छिपाया गया है।
हालांकि, ईरान की तरफ से इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस पूरे मामले पर संदेह बना हुआ है।
क्या है ‘न्यूक्लियर डस्ट’?
दरअसल “न्यूक्लियर डस्ट” कोई तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि ट्रंप द्वारा इस्तेमाल किया गया एक अनौपचारिक शब्द है। इसका मतलब उस अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम से है, जिसे परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
और भी पढ़ें : Dhurandhar Franchise ने रचा इतिहास, 3000 करोड़ पार, Sara Arjun ने Yalina बनकर जीता करोड़ों दिल
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह यूरेनियम ईरान के उन परमाणु ठिकानों के नीचे मौजूद हो सकता है, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी हमलों के दौरान निशाना बनाया गया था।
ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ मिलकर इस “न्यूक्लियर डस्ट” को जमीन से निकालकर खत्म करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ईरान में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। हालांकि, इस तरह के दावों ने कूटनीतिक माहौल को और जटिल बना दिया है।
ईरान के पास कितना यूरेनियम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों से पहले ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद था। इसके अलावा करीब 200 किलोग्राम 20 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम भी था, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत तक बढ़ाकर हथियार-ग्रेड बनाया जा सकता है।

यही आंकड़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का कारण बने हुए हैं।
ईरान का पक्ष
ईरान हमेशा से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और कई देशों को इस पर संदेह बना हुआ है।
बढ़ती वैश्विक चिंता
“न्यूक्लियर डस्ट” जैसे शब्द और इस तरह के दावे यह दिखाते हैं कि परमाणु मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक भी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता होता है या यह विवाद और गहराता है।

Pingback: लाल सागर से दूरी क्यों? USS George W. Bush ने चुना लंबा रास्ता, हूती खतरे से बढ़ी चिंता - Dainik Diary - Authentic Hindi News
Pingback: दिल्ली-NCR में Raheja Developers पर ED की बड़ी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग केस में छापेमारी - Dainik Diary - Authentic Hindi News
Pingback: Paytm Payments Bank बंद होने की राह पर, RBI के फैसले के बाद बोर्ड ने दी मंजूरी - Dainik Diary - Authentic Hindi News