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मध्य पूर्व संकट पर PM Narendra Modi और मैक्रों की अहम बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा संदेश

भारत-फ्रांस ने शांति और समुद्री सुरक्षा पर जताई चिंता, तेल सप्लाई के अहम रूट को सुरक्षित रखने पर जोर

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PM Modi Macron Talks: होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत-फ्रांस की बड़ी पहल
PM मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने मध्य पूर्व संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य पर की चर्चा

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत और फ्रांस ने मिलकर शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम पहल की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन पर बातचीत में क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और खासतौर पर Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। दोनों देशों ने इस अहम समुद्री मार्ग पर जल्द से जल्द सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब लगभग 50 दिनों से जारी है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई और व्यापार प्रभावित हो रहा है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% कच्चा तेल और गैस गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रखेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस की यह पहल कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। भारत जहां ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है, वहीं फ्रांस भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता में अहम भूमिका निभाता रहा है।

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भारत लंबे समय से “डायलॉग और डिप्लोमेसी” के जरिए समस्याओं के समाधान की बात करता आया है। ऐसे में यह बातचीत यह संकेत देती है कि भारत न सिर्फ अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक शांति के प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई यह बातचीत एक सकारात्मक संकेत है, जो यह दर्शाती है कि बड़े देश अब मिलकर इस संकट का समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कूटनीतिक प्रयास का जमीन पर कितना असर पड़ता है।