World News
$100 बिलियन की जंग! अमेरिका-ईरान वार्ता में ‘फ्रीज्ड एसेट्स’ बना सबसे बड़ा मुद्दा
दशकों पुराने प्रतिबंधों के बीच ईरान की मांग—विदेशों में जमा अरबों डॉलर तुरंत लौटाए जाएं
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नया मुद्दा सबसे अहम बनकर उभरा है—ईरान की विदेशों में जमा ‘फ्रीज्ड एसेट्स’। अनुमान है कि ये राशि 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा हो सकती है, जो आज की वार्ताओं में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है।
दरअसल, दोनों देशों के बीच होने वाली अगली शांति वार्ता से पहले तेहरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसके जमे हुए पैसे वापस नहीं मिलते, तब तक किसी भी समझौते की राह आसान नहीं होगी।
क्या होते हैं ‘फ्रीज्ड एसेट्स’?
जब किसी देश, कंपनी या व्यक्ति की संपत्ति—जैसे बैंक खातों में पैसा, निवेश या अन्य वित्तीय संसाधन—किसी अन्य देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा रोक दिए जाते हैं, तो उसे ‘फ्रीज्ड एसेट्स’ कहा जाता है।
यह कदम आमतौर पर प्रतिबंध (Sanctions), कानूनी आदेश या अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में उठाया जाता है। लेकिन आलोचकों का मानना है कि कई बार इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए भी किया जाता है।
और भी पढ़ें : मिडिल ईस्ट में शांति का नया फॉर्मूला: Xi Jinping का 4-पॉइंट प्लान, दुनिया की बढ़ी नजरें
1979 से शुरू हुई कहानी
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की शुरुआत ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी। उस समय तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया था।
इसके बाद से अमेरिका ने धीरे-धीरे ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जो समय के साथ और सख्त होते गए—खासतौर पर उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर।
आखिर कहां जमा हैं ईरान के अरबों डॉलर?
ईरान के फ्रीज्ड एसेट्स दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- चीन में करीब 20 बिलियन डॉलर
- भारत में लगभग 7 बिलियन डॉलर
- इराक में 6 बिलियन डॉलर
- जापान में करीब 1.5 बिलियन डॉलर
- कतर में लगभग 6 बिलियन डॉलर
इसके अलावा अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में भी अरबों डॉलर की संपत्ति फ्रीज है।
हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं है और विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक राशि इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है ये पैसा?
ईरान की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से भारी दबाव में है। तेल निर्यात पर प्रतिबंध, विदेशी निवेश में गिरावट और तकनीकी विकास में रुकावट ने देश को आर्थिक संकट में धकेल दिया है।
महंगाई तेजी से बढ़ी है और ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की कीमत में भारी गिरावट आई है। ऐसे में अगर यह फ्रीज्ड पैसा वापस मिलता है, तो ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में बड़ी मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पैसे से ईरान:
- अपने तेल व्यापार से कमाई गई रकम को वापस देश में ला सकेगा
- मुद्रा स्थिरता बनाए रख सकेगा
- महंगाई को नियंत्रित कर सकेगा
- और आर्थिक विकास को फिर से गति दे सकेगा
क्या अमेरिका तैयार है?
सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई पिछली बातचीत के दौरान यह चर्चा जरूर हुई थी कि कुछ फंड्स को अनफ्रीज किया जा सकता है, लेकिन अमेरिका ने बाद में इन दावों को खारिज कर दिया।
अब अगली वार्ता में यह मुद्दा फिर से उठने की पूरी संभावना है।
वैश्विक राजनीति पर असर
ईरान अकेला ऐसा देश नहीं है, जिसके एसेट्स फ्रीज किए गए हैं। रूस, उत्तर कोरिया, वेनेजुएला और क्यूबा जैसे देशों पर भी इसी तरह के कदम उठाए गए हैं।
इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया है या फिर वैश्विक राजनीति का एक बड़ा हथियार?
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता में यह मुद्दा सबसे अहम रहने वाला है। अगर इस पर सहमति बनती है, तो यह न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों में सुधार ला सकता है, बल्कि मध्य पूर्व में स्थिरता की नई उम्मीद भी जगा सकता है।
फिलहाल, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अरबों डॉलर की यह ‘जमी हुई संपत्ति’ पिघलेगी या फिर तनाव और बढ़ेगा।
