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पहलगाम हमले को एक साल: लौट रहे हैं सैलानी, लेकिन कारोबार अब भी सुस्त
पर्यटन में हल्की रौनक लौटी, फिर भी होटल, दुकानदार और स्थानीय लोग कर रहे हैं संघर्ष
जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत हिल स्टेशन Pahalgam में हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो चुका है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले ने न सिर्फ कई जिंदगियां छीन ली थीं, बल्कि यहां की रौनक और पर्यटन उद्योग को भी गहरी चोट पहुंचाई थी।
अब, एक साल बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं। पर्यटक फिर से घाटियों की ओर लौट रहे हैं, नजारे देख रहे हैं और तस्वीरें खींच रहे हैं। हालांकि, पहले जैसी भीड़ और चहल-पहल अब भी गायब है।
स्थानीय दुकानदारों और होटल व्यवसायियों के लिए यह समय अभी भी मुश्किल भरा है। कश्मीरी हस्तशिल्प बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि पहले इस मौसम में ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, लेकिन अब पर्यटकों की संख्या काफी कम है। इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ा है।
रेस्टोरेंट चलाने वाले लोगों की हालत भी कुछ अलग नहीं है। जहां पहले एक दिन में ₹30,000 से ₹50,000 तक की कमाई हो जाती थी, वहीं अब यह घटकर ₹5,000 से ₹8,000 तक रह गई है। कई पर्यटक अब रात रुकने से बच रहे हैं, जिससे होटल इंडस्ट्री को भी नुकसान हो रहा है।
Pahalgam Hoteliers Association के अनुसार, कई होटल बंद हो चुके हैं और बाकी को स्टाफ कम करना पड़ा है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए होटल रूम के किराए 50-60% तक घटाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सुधर नहीं पाई है।
सरकार और प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। कई प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स को दोबारा खोल दिया गया है, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े। हालांकि, मशहूर Baisaran Meadows, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है, अभी भी बंद है।
घुड़सवारी से जुड़े लोगों की आमदनी भी काफी घट गई है। पहले जहां दिनभर में अच्छी कमाई हो जाती थी, अब मुश्किल से ₹500-₹600 तक ही कमा पा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जो पर्यटक यहां आ रहे हैं, वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई सैलानियों ने कहा कि पहलगाम आज भी उतना ही खूबसूरत है और यहां सुरक्षा को लेकर कोई खास चिंता नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आतंकी घटना के बाद पर्यटन को पूरी तरह पटरी पर लौटने में समय लगता है। उदाहरण के तौर पर, दुनिया के कई टूरिस्ट डेस्टिनेशन ऐसे हादसों के बाद धीरे-धीरे ही सामान्य हो पाए हैं।
फिलहाल, पहलगाम फिर से अपनी पहचान पाने की कोशिश कर रहा है—जहां प्राकृतिक सुंदरता तो पहले जैसी ही है, लेकिन भीड़ और कारोबार को लौटने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा।
