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हर साल ₹1.61 लाख करोड़ का Edible Oil आयात करता है India, आखिर किसान इसकी खेती से क्यों बचते हैं?
PM Narendra Modi की अपील के बाद फिर चर्चा में आया Edible Oil संकट, जानिए क्यों India अब भी आयात पर निर्भर है।
हाल ही में Narendra Modi के एक बयान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अपने संबोधन में उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने, सोने की खरीद टालने और यहां तक कि खाने में इस्तेमाल होने वाले vegetable oil को कम करने की अपील की।
इस अपील के बाद एक बड़ा सवाल फिर चर्चा में आ गया — आखिर कृषि प्रधान देश होने के बावजूद India अपने लोगों के लिए पर्याप्त edible oil क्यों नहीं पैदा कर पाता?
आज हालत यह है कि India दुनिया के सबसे बड़े edible oil importers में शामिल है। हर साल देश करीब 15 से 16 million tonnes edible oil विदेशों से मंगाता है, जिस पर लगभग INR1.61 लाख करोड़ यानी करीब 18.3 billion dollar खर्च होते हैं। यह रकम देश के foreign exchange पर भारी दबाव डालती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण किसानों का oilseed crops से दूरी बनाना है। International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics यानी ICRISAT के Director General Dr Himanshu Pathak का कहना है कि किसान oilseeds को “risky crops” मानते हैं।
उनके अनुसार rice और wheat जैसी फसलों को सरकार की procurement policy, MSP और दूसरी सुविधाओं का मजबूत सहारा मिलता है। वहीं oilseed crops में बारिश की अनिश्चितता, कीट और बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में किसान कम जोखिम वाली फसलों की तरफ झुक जाते हैं।
Punjab और Haryana जैसे राज्यों में rice-wheat rotation इसी वजह से लगातार जारी है। यहां किसानों को खरीद की गारंटी, मुफ्त बिजली और सरकारी समर्थन मिलता है। जबकि oilseed crops को अक्सर कम उपजाऊ जमीन और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है, जिससे उत्पादन भी कम रहता है।
Dr Himanshu Pathak का मानना है कि अगर rice production की असली लागत — जैसे पानी और बिजली — को ध्यान में रखा जाए, तो oilseeds ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लेकिन मौजूदा policy structure अभी भी rice और wheat के पक्ष में दिखाई देता है।
हालांकि अब सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएं इस दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। नई research के जरिए ऐसे oilseed varieties तैयार किए गए हैं जो pests, diseases और climate stress को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं। बेहतर quality seeds से उत्पादन में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने National Mission on Edible Oilseeds शुरू किया है। यह मिशन 2024-25 से 2030-31 तक चलेगा, जिसके लिए INR 10,103 करोड़ का बजट तय किया गया है।
इस योजना के तहत rapeseed-mustard, soybean, groundnut, sunflower और sesamum जैसी फसलों पर खास फोकस किया जाएगा। साथ ही सरकार fallow land पर खेती बढ़ाने, intercropping को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर insurance व MSP support देने की तैयारी में है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2030-31 तक oilseed production को 39 million tonnes से बढ़ाकर लगभग 69.7 million tonnes तक पहुंचाया जाए। अगर ऐसा होता है तो India को edible oil imports पर निर्भरता काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि edible oil imports कम होने से न सिर्फ foreign exchange बचेगा, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी और global price shocks का असर भी कम होगा। आने वाले वर्षों में food security और climate challenges के बीच edible oil sector India के लिए एक बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन सकता है।
