Economy
Russia दौरा रद्द होने के बीच चर्चा में India की Oil रणनीति, क्या महंगा होगा Crude Oil?
निर्मला सीतारमण का रूस दौरा टला, उधर रूस ने भारत को भरोसा दिया— ऊर्जा सप्लाई पर बाहरी दबाव का असर नहीं पड़ेगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का प्रस्तावित रूस दौरा अचानक रद्द होने के बाद भारत-रूस संबंध और ऊर्जा कारोबार एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीतारमण को BRICS बैंक और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की अहम बैठकों में हिस्सा लेने रूस जाना था, लेकिन घरेलू राजनीतिक और संसदीय व्यस्तताओं के चलते यह दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि संसद में महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़ी तैयारियों को देखते हुए सरकार फिलहाल घरेलू एजेंडे पर ज्यादा फोकस कर रही है। हालांकि, इस बीच रूस की तरफ से भारत को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया गया है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते “अटूट” हैं और किसी भी बाहरी दबाव का असर दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि रूस भारत को तेल, गैस और कोयले की सप्लाई पहले की तरह जारी रखेगा।
लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे सक्रिय नेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और रूस इसमें एक अहम साझेदार बना रहेगा।
इस बीच सबसे बड़ी चिंता अमेरिका की उस छूट (waiver) को लेकर बनी हुई है, जिसके तहत भारत समेत कुछ देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिली हुई है। यह छूट 16 मई के बाद बढ़ेगी या नहीं, इस पर अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अगर यह छूट आगे नहीं बढ़ाई गई तो भारतीय रिफाइनरियों को दूसरे देशों से महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
और भी पढ़ें : भारत को मिला पहला स्वदेशी Semi-High-Speed Rail Corridor, गुजरात में दौड़ेगी नई रफ्तार वाली ट्रेन
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया के हालात के बीच भारत के लिए सस्ती ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे समय में रूस के साथ मजबूत संबंध भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

रूस ने तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट का भी जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रोजेक्ट 2027 तक पूरी क्षमता के साथ चालू हो सकता है।
फिलहाल, सबकी नजर अमेरिका के अगले फैसले और BRICS देशों की आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।
