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Economy

भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर, वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई साझेदारी की शुरुआत

पियूष गोयल बोले—दुनिया की अर्थव्यवस्था नए सिरे से बन रही है, भारत ने चुना मजबूत साझेदार

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India-New Zealand Sign Free Trade Agreement, Boost to Trade & Investment | Dainik Diary
भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर का ऐतिहासिक पल

वैश्विक व्यापार के बदलते दौर में भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है। India और New Zealand के बीच सोमवार, 27 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए।

नई दिल्ली में हुए इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।

क्या है इस समझौते की खासियत?

इस FTA के तहत भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में टैरिफ-फ्री (बिना शुल्क) पहुंच मिलेगी। इससे आने वाले 15 वर्षों में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश आने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और देश नए-नए साझेदार तलाश रहे हैं।

पियूष गोयल का बड़ा बयान

समझौते के बाद Piyush Goyal ने कहा,
“आज दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से गढ़ी जा रही है। देश अपने नए सहयोगी चुन रहे हैं और भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत और न्यूजीलैंड का साथ आना बेहद अहम है।”

उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता केवल 9 महीनों में पूरा हुआ, जो दोनों देशों के बीच मजबूत विश्वास को दर्शाता है।

व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

न्यूजीलैंड के मंत्री Todd McClay ने कहा कि यह समझौता सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि:

  • नए रोजगार पैदा करेगा
  • व्यापार और निर्यात को बढ़ावा देगा
  • इनोवेशन और निवेश को गति देगा

भारत के लिए क्यों अहम है यह FTA?

यह समझौता भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह विकसित देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।

India-New Zealand Sign Free Trade Agreement, Boost to Trade & Investment | Dainik Diary


पिछले साढ़े तीन वर्षों में यह भारत का सातवां FTA है, और आने वाले समय में European Union और United States के साथ भी ऐसे समझौते होने की संभावना है।

बदलती दुनिया में नई साझेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत बनाएंगे और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे।