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Supreme Court ने Pawan Khera को दी राहत कहा, “राजनीतिक दुश्मनी के नाम पर आज़ादी नहीं छिनी जा सकती”

Assam CM Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sarma के foreign passport मामले में Congress नेता Pawan Khera को Anticipatory Bail मिली — Gauhati High Court का फैसला Supreme Court ने पलटा, Article 21 का हवाला दिया

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Pawan Khera को Supreme Court से Bail: Article 21 पर बड़ा फैसला, Himanta की पत्नी के Passport Case में राहत | Dainik Diary
Supreme Court ने Congress नेता Pawan Khera को anticipatory bail दी — Article 21 और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अहम टिप्पणी के साथ Gauhati High Court का फैसला पलटा।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जो सिर्फ एक नेता की ज़मानत नहीं, बल्कि भारतीय संविधान की उस बुनियाद को मज़बूत करता है जिस पर हर नागरिक की आज़ादी टिकी है। Supreme Court ने Congress के वरिष्ठ नेता और पार्टी के Media & Publicity Department के प्रमुख Pawan Khera को anticipatory bail देते हुए कहा — “राजनीतिक दुश्मनी की आड़ में किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरे में नहीं डाला जा सकता।”

Justice JK Maheshwari और Justice AS Chandurkar की bench ने यह फैसला सुनाते हुए Constitution of India के Article 21 का हवाला दिया — वो अनुच्छेद जो हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है। कोर्ट ने साफ कहा कि आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल निष्पक्षता और सावधानी के साथ होना चाहिए, और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रंग से दागी न हो।

पूरा विवाद क्या था?

मामले की शुरुआत 5 अप्रैल 2026 को हुई जब Pawan Khera ने दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह आरोप लगाया कि Assam के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sarma के पास UAE, Egypt और Antigua & Barbuda के foreign passports हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका में उनकी एक कंपनी है जिसे Sarma के election affidavit में घोषित नहीं किया गया।

इसके जवाब में Riniki Bhuyan Sarma ने शिकायत दर्ज कराई और Guwahati Crime Branch में FIR (Case No. 04/2026) दर्ज हुई। Assam Police का कहना था कि Khera ने जो दस्तावेज़ दिखाए वो नकली, जाली और fabricated थे। Ministry of External Affairs ने भी कथित रूप से पुष्टि की कि passport images फर्जी थे।

अदालतों का सफर

Khera ने पहले Telangana High Court का रुख किया जहाँ उन्हें 10 अप्रैल को एक हफ्ते की transit anticipatory bail मिली। लेकिन Assam सरकार Supreme Court गई और 15 अप्रैल को यह राहत रुक गई। Khera को Gauhati High Court जाने का निर्देश मिला। वहाँ 24 अप्रैल को High Court ने उनकी bail अर्जी खारिज कर दी — कहा कि custodial interrogation ज़रूरी है।

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लेकिन Supreme Court ने इस पूरे फैसले को “incorrect appreciation of material” बताया। कोर्ट ने कहा कि High Court ने बोझ को accused पर गलत तरीके से डाला।

Supreme Court की बड़ी बातें

कोर्ट ने Khera को ज़मानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखीं — जाँच में सहयोग करना होगा, trial court की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते, और गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकते।

Pawan Khera को Supreme Court से Bail: Article 21 पर बड़ा फैसला, Himanta की पत्नी के Passport Case में राहत | Dainik Diary


लेकिन उससे भी बड़ी बात यह रही कि कोर्ट ने दोनों पक्षों पर टिप्पणी की। Khera के बारे में कहा कि उन्होंने Assam elections को देखते हुए राजनीतिक फायदे के लिए बयान दिए। और Sarma के बारे में भी कहा कि उनके कुछ बयान “parliamentary language” के अनुरूप नहीं थे।

यह मामला याद दिलाता है 1994 के मशहूर ADM Jabalpur judgment के उस सबक की जिसे Supreme Court ने 2017 में Justice K.S. Puttaswamy केस में पलट दिया था — तब कोर्ट ने माना था कि Article 21 अजेय है, इसे किसी भी हालत में suspend नहीं किया जा सकता। Pawan Khera के मामले में भी यही भावना दोहराई गई।

Solicitor General Tushar Mehta ने Assam सरकार की ओर से कोर्ट में कहा था कि यह जाँचना ज़रूरी है कि Khera को नकली दस्तावेज़ किसने दिए और fake seal कैसे बनाई गई। वहीं Khera के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने इसे “unprecedented” और “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया।

अब Khera को जाँच में सहयोग करना होगा और मामला आगे चलता रहेगा। लेकिन Supreme Court का यह फैसला एक संदेश है — लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए आपराधिक मशीनरी का इस्तेमाल संविधान की भावना के खिलाफ है।