Connect with us

Economy

मिडिल ईस्ट संकट से भारत में महंगाई का खतरा! RBI ने दी चेतावनी

तेल सप्लाई में बाधा से बढ़ सकती हैं कीमतें, RBI ‘वेट एंड वॉच’ मोड में

Published

on

RBI Warns Inflation Risk From Middle East Conflict Impact On India
मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI ने महंगाई बढ़ने की आशंका जताई

मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिख रहा है। Reserve Bank of India (RBI) ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो देश में महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है।

RBI के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा कि सबसे बड़ा खतरा “सेकंड-राउंड इफेक्ट” का है। यानी शुरुआत में जो कीमतों में बढ़ोतरी होती है, वह धीरे-धीरे पूरे बाजार में फैल जाती है और स्थायी महंगाई का रूप ले सकती है।

उन्होंने अपने बयान में साफ किया कि अगर सप्लाई में रुकावट बनी रहती है, तो कच्चे तेल और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

दरअसल, भारत का मध्य पूर्व से गहरा आर्थिक जुड़ाव है। देश के कुल निर्यात का लगभग छठा हिस्सा और आयात का करीब पांचवां हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। इसके अलावा, भारत को मिलने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा भी यहीं से आता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में ईंधन की कीमतों में उतनी तेजी नहीं आई है, जितनी अन्य देशों में देखी गई है। इसका कारण यह है कि सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल नुकसान उठाकर कीमतों को नियंत्रित कर रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं टिक सकती।

अगर आने वाले समय में तेल कंपनियां कीमतें बढ़ाती हैं, तो इससे महंगाई और बढ़ सकती है। पहले से ही खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें लोगों पर दबाव बना रही हैं।

RBI ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखा है और “वेट एंड वॉच” की नीति अपनाई है। गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक अब ज्यादा डेटा पर निर्भर होकर फैसले लेगा, ताकि सही समय पर सही कदम उठाया जा सके।

RBI Warns Inflation Risk From Middle East Conflict Impact On India


विशेषज्ञों के अनुसार, अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो RBI को ब्याज दरें बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे लोन महंगे हो सकते हैं और आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।

उदाहरण के तौर पर, पिछले वर्षों में जब कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था, तब ट्रांसपोर्ट से लेकर खाने-पीने की चीजों तक सब कुछ महंगा हो गया था।

ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि मिडिल ईस्ट का संकट कितना लंबा चलता है और इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ता है।