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Economy

India में लग्ज़री मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा, लेकिन क्यों नहीं बन पा रहा ‘चीन जैसा सुपर पावर’?

अमीरों की बढ़ती संख्या से मिल रहा बूस्ट, लेकिन कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमित बाजार बना रहे सबसे बड़ी बाधा

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India Luxury Market: तेजी के बावजूद क्यों नहीं बन पा रहा चीन जैसा बड़ा बाजार?
भारत में बढ़ते लग्ज़री ब्रांड्स, लेकिन सीमित बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर बनी चुनौती

भारत में लग्ज़री मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। बड़े-बड़े ग्लोबल ब्रांड अब देश में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं—Tesla ने मुंबई और दिल्ली में एंट्री ली, BMW और Jaguar Land Rover ने नए शोरूम खोले, जबकि Apple ने अपने स्टोर्स का विस्तार किया।

पहली नजर में लगता है कि भारत का लग्ज़री बाजार उड़ान भर चुका है। लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है।


अमीर बढ़े, बाजार भी बढ़ा

भारत में डॉलर-मिलियनेयर परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 में जहां यह संख्या करीब 4.5 लाख थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 8.7 लाख हो गई।

यही वर्ग लग्ज़री मार्केट का सबसे बड़ा ग्राहक है।

  • पुराने अमीर (बिजनेस फैमिली)
  • नए अमीर (स्टार्टअप और प्रोफेशनल्स)
  • और उभरते युवा खरीदार

ये तीनों मिलकर लग्ज़री डिमांड को आगे बढ़ा रहे हैं।


ग्लोबल एक्सपोज़र ने बदली सोच

आज का भारतीय ग्राहक सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि अनुभव भी देखता है।

दुबई, सिंगापुर और पेरिस जैसे शहरों में शॉपिंग और सोशल मीडिया ने लोगों की पसंद बदल दी है। अब लोग वही एक्सपीरियंस भारत में भी चाहते हैं।

इसी वजह से Prada जैसे ब्रांड पहले ब्यूटी सेगमेंट से एंट्री लेकर धीरे-धीरे बड़ा विस्तार करने की रणनीति अपना रहे हैं।


ऑनलाइन बना सबसे बड़ा हथियार

भारत में 60% से ज्यादा लग्ज़री प्रोडक्ट्स की खोज ऑनलाइन होती है।

Tata Cliq, Myntra और Ajio जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टियर-2 और टियर-3 शहरों तक लग्ज़री पहुंचा दी है।

यही वजह है कि छोटे शहरों में भी प्रीमियम ब्रांड्स की मांग बढ़ रही है।


सबसे बड़ी समस्या: जगह और इंफ्रास्ट्रक्चर

भारत के लग्ज़री बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी है—इंफ्रास्ट्रक्चर

  • क्वालिटी रिटेल स्पेस की भारी कमी
  • प्रति व्यक्ति सिर्फ 0.07 sq ft Grade-A स्पेस
  • थाईलैंड जैसे देशों से 30 गुना कम

यही कारण है कि कई बड़े ब्रांड भारत आना चाहते हैं, लेकिन सही लोकेशन नहीं मिलती।


कुछ ही शहरों तक सीमित

मुंबई का Jio World Plaza और दिल्ली का Emporio जैसे लग्ज़री मॉल्स मौजूद हैं, लेकिन ये सिर्फ चुनिंदा इलाकों तक सीमित हैं।

इससे बाजार का विस्तार रुक जाता है और डिमांड होने के बावजूद सप्लाई सीमित रहती है।

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पार्टनरशिप मॉडल की मजबूरी

भारत में कई विदेशी ब्रांड सीधे एंट्री नहीं करते, बल्कि

  • Reliance Brands Limited
  • Aditya Birla Fashion and Retail

जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करते हैं।

यह मॉडल आसान तो है, लेकिन यह भी दिखाता है कि भारत में व्यापार करना अभी भी जटिल है।


K-Shape इकोनॉमी का असर

भारत का लग्ज़री बाजार “K-shaped” है—
यानी अमीर और ज्यादा अमीर हो रहे हैं, लेकिन बाकी आबादी उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ रही।

इसके उलट चीन में व्यापक आय वृद्धि और मजबूत शहरों के कारण लग्ज़री बाजार बड़े स्तर पर फैल पाया।


India Luxury Market: तेजी के बावजूद क्यों नहीं बन पा रहा चीन जैसा बड़ा बाजार?


चीन से तुलना में पीछे

भारत का लग्ज़री बाजार अभी लगभग $12 बिलियन का है, जो चीन के मुकाबले 3% से भी कम है।

इसका मतलब है कि भारत में संभावनाएं तो बहुत हैं, लेकिन स्केल अभी छोटा है।


निष्कर्ष

भारत में लग्ज़री मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी जड़ें अभी मजबूत नहीं हैं।

जब तक:

  • इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर नहीं होता
  • मिडिल क्लास की आय नहीं बढ़ती
  • और शहरों में रिटेल स्पेस नहीं बढ़ता

तब तक यह बाजार कुछ चुनिंदा इलाकों और अमीर वर्ग तक ही सीमित रहेगा।