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Economy

ज्यादा पढ़ाई, ज्यादा बेरोजगारी? Zerodha की रिपोर्ट ने उठाए चौंकाने वाले सवाल

भारत में ग्रेजुएट युवाओं की बेरोजगारी 40% तक, अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा

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India Unemployment: Zerodha Explains Why Educated Youth Face Higher Joblessness
भारत में पढ़े-लिखे युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बनती जा रही है

भारत में शिक्षा को हमेशा सफलता की कुंजी माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़े इस सोच पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऑनलाइन ब्रोकरेज कंपनी Zerodha के एक विश्लेषण के अनुसार, देश में जितना ज्यादा शिक्षित व्यक्ति होता है, उसके बेरोजगार रहने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अशिक्षित लोगों में बेरोजगारी दर सिर्फ 3% है, वहीं 15 से 24 साल के ग्रेजुएट युवाओं में यह आंकड़ा करीब 40% तक पहुंच जाता है। यह डेटा देश के जॉब मार्केट और शिक्षा व्यवस्था के बीच बढ़ते अंतर को साफ तौर पर दिखाता है।

National Sample Survey Office (NSSO) द्वारा जारी Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2023-24 के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 2025 तक 80.9% हो चुकी है, लेकिन अब भी करीब 20% आबादी औपचारिक शिक्षा से वंचित है। 1.4 अरब से अधिक की आबादी वाले देश में यह संख्या काफी बड़ी है।

Zerodha के सह-संस्थापक Nithin Kamath के प्लेटफॉर्म “Markets by Zerodha” ने इस अंतर को समझाते हुए बताया कि समस्या शिक्षा में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की सीमाओं में है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा लोगों की उम्मीदें बढ़ा देती है, लेकिन अर्थव्यवस्था उन उम्मीदों के अनुसार नौकरियां पैदा नहीं कर पा रही है। जहां एक अशिक्षित व्यक्ति किसी भी तरह का काम करने को तैयार हो जाता है, वहीं एक पढ़ा-लिखा युवा बेहतर अवसर की तलाश में इंतजार करता रहता है—और कई बार वह अवसर आता ही नहीं।

इसका असर यह होता है कि कई ग्रेजुएट्स मजबूरी में अस्थायी, गिग या अनौपचारिक नौकरियों की ओर रुख करते हैं, जो न तो स्थिर होती हैं और न ही लंबे समय तक सुरक्षित।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश, जहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, वहां यह स्थिति भविष्य में और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अनुमान है कि 2030 तक कामकाजी आबादी का अनुपात अपने चरम पर होगा, जिसके बाद इसमें गिरावट शुरू हो सकती है।

India Unemployment: Zerodha Explains Why Educated Youth Face Higher Joblessness


इसके अलावा, महिला श्रम भागीदारी दर करीब 35% पर स्थिर रहना, कृषि से गैर-कृषि क्षेत्र में बदलाव की धीमी गति, और स्किल गैप जैसी समस्याएं भी इस संकट को और गहरा बना रही हैं।

उदाहरण के तौर पर, कई इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स आज भी अपनी पढ़ाई के अनुरूप नौकरी नहीं पा रहे हैं और उन्हें कम वेतन वाली नौकरियों से समझौता करना पड़ रहा है।

यह स्थिति साफ संकेत देती है कि केवल डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है—स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक ट्रेनिंग और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।