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रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा रुपया! डॉलर के मुकाबले 93.39 पर बंद, बढ़ी आर्थिक चिंता

अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

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Indian Rupee Falls to Record Low of 93.39 Against US Dollar Amid Global Tensions
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट—वैश्विक तनाव और महंगे तेल का असर साफ नजर आया।

भारतीय मुद्रा पर वैश्विक घटनाओं का असर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को रुपया 56 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.39 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

फॉरेक्स बाजार में रुपया 93.30 के स्तर पर खुला और दिनभर के कारोबार में 93.25 से 93.40 के बीच झूलता रहा। अंत में यह 93.39 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद 92.83 के मुकाबले बड़ी गिरावट है।

क्यों गिरा रुपया?
विशेषज्ञों के अनुसार, United States और Iran के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके चलते अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक करने की घोषणा ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

इसका सीधा असर Strait of Hormuz पर पड़ा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

तेल की कीमतों में उछाल
ग्लोबल बेंचमार्क Brent Crude की कीमत में करीब 7% से ज्यादा की तेजी आई और यह 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयातक देश पर दबाव बढ़ता है, जिससे रुपये की कमजोरी और बढ़ जाती है।

डॉलर मजबूत, निवेशक सतर्क
डॉलर इंडेक्स भी मजबूत होकर 98.75 तक पहुंच गया, जिससे वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ी। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू किया, जिससे रुपये पर और दबाव आया।

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शेयर बाजार में भी गिरावट
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। BSE Sensex 700 अंकों से ज्यादा गिरकर 76,847 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 भी 200 अंकों से अधिक टूट गया।

आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आने वाले दिनों में रुपया 93 से 93.80 के दायरे में कारोबार कर सकता है।

हालांकि, एक सकारात्मक खबर यह है कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई है, जो भविष्य में रुपये को कुछ हद तक सहारा दे सकता है।

Indian Rupee Falls to Record Low of 93.39 Against US Dollar Amid Global Tensions


निष्कर्ष
रुपये की यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों को आने वाले समय में बाजार की चाल पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।