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ईरान वार्ता से पहले बड़ा यू-टर्न: Donald Trump ने पाकिस्तान भेजे जा रहे अमेरिकी दल को रोका

अमेरिका-ईरान बातचीत पर अनिश्चितता बढ़ी, ट्रंप बोले—“फोन पर भी हो सकती है बात”

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Trump Cancels Pakistan Trip: US-Iran Talks पर बड़ा झटका
डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी दल का दौरा रद्द किया

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी अधिकारियों के दौरे को अचानक रद्द कर दिया है। यह वही दौरा था, जिसके जरिए दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला उस समय लिया गया जब बातचीत में कोई खास प्रगति नजर नहीं आ रही थी। ट्रंप ने साफ कहा कि इस समय लंबी यात्रा करना जरूरी नहीं है और बातचीत फोन या अन्य माध्यमों से भी जारी रह सकती है।

किन अधिकारियों को जाना था पाकिस्तान?

इस दौरे में अमेरिका के खास दूत और शीर्ष सलाहकारों को पाकिस्तान भेजा जाना था, जहां उनकी मुलाकात ईरानी प्रतिनिधियों से होनी थी। लेकिन आखिरी वक्त पर इस योजना को रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने खुद अपने अधिकारियों को यात्रा रद्द करने का निर्देश दिया।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका को लग रहा था कि मौजूदा हालात में बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकलना मुश्किल है। ऐसे में ट्रंप ने इसे “समय की बर्बादी” मानते हुए यह कदम उठाया।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका की सख्त कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे ईरान पर दबाव बनाया जा सके।

पहले क्या थी स्थिति?

इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में बातचीत की तैयारी जोर-शोर से चल रही थी। पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों को आमने-सामने लाने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, ईरान की तरफ से भी कई बार यह कहा गया है कि वह सीधे बातचीत के लिए तैयार नहीं है और संवाद अप्रत्यक्ष रूप से ही होगा।

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क्या इसका असर पड़ेगा?

इस फैसले के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ पाएगी या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बातचीत की गति धीमी पड़ सकती है, लेकिन पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है।

वैश्विक राजनीति पर असर

मध्य-पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल है। ऐसे में इस तरह के फैसले न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या यह टकराव और बढ़ेगा।