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पाकिस्तान में फिर आमने-सामने होंगे अमेरिका और ईरान, दूसरी दौर की वार्ता में बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी
Donald Trump के करीबी दूत करेंगे बातचीत की अगुवाई, लेकिन JD Vance और Mohammad Bagher Ghalibaf नहीं होंगे शामिल
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच अब एक बार फिर बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधि जल्द ही पाकिस्तान में दूसरे दौर की अहम वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे। खास बात यह है कि इस बार बातचीत में कुछ बड़े चेहरे शामिल नहीं होंगे, जिससे इस मीटिंग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी देते हुए प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने पुष्टि की है कि अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner पाकिस्तान पहुंचकर ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे। ये दोनों पहले दौर की वार्ता में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
ईरान की पहल पर शुरू हुई नई बातचीत
इस नई बैठक की पहल ईरान की तरफ से की गई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा “समय के हिसाब से महत्वपूर्ण” बताया था। इसके बाद ही दोनों देशों के बीच दोबारा आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की तैयारी शुरू हुई।
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बताया जा रहा है कि इस बार की बातचीत ज्यादा संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित होगी, जिसमें क्षेत्रीय तनाव, सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
बड़े नेताओं की गैरहाजिरी बनी चर्चा का कारण
जहां एक ओर बातचीत की उम्मीदें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस बात ने सबका ध्यान खींचा है कि इस बार अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख Mohammad Bagher Ghalibaf इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीतिक फैसला हो सकता है, ताकि बातचीत का माहौल ज्यादा लचीला और कम राजनीतिक दबाव वाला बनाया जा सके। हालांकि, कुछ लोग इसे वार्ता की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करने वाला मान रहे हैं।

पहले दौर की वार्ता से क्या मिला?
इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान में ही पहले दौर की बातचीत हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने कुछ मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, कोई बड़ा समझौता सामने नहीं आया, लेकिन बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी थी।
अब दूसरी बैठक से उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश कुछ ठोस कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
क्या बदलेगा समीकरण?
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरण के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। अगर इस बार कोई सकारात्मक परिणाम निकलता है, तो यह क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा संकेत हो सकता है।
फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान में होने वाली यह बैठक किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने की दिशा में कोई नई राह खोल पाएगी।
