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“इकोनॉमिक न्यूक्लियर वेपन” पर मचा वैश्विक हंगामा: ईरान पर Marco Rubio का बड़ा आरोप

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी—अमेरिकी नेता बोले, ईरान अपनी आंतरिक समस्याओं से निकलने के लिए बना रहा दबाव

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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का दृश्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है और जिस पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का दृश्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है और जिस पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

दुनिया की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है, और इस बार केंद्र में है ईरान और उसका रणनीतिक कदम। अमेरिका के वरिष्ठ नेता Marco Rubio ने हाल ही में ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह “इकोनॉमिक न्यूक्लियर वेपन” का इस्तेमाल करने की स्थिति बना रहा है।

क्या है “इकोनॉमिक न्यूक्लियर वेपन”?

रुबियो का इशारा Strait of Hormuz की ओर था—यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अगर ईरान इस मार्ग को बाधित करता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर किसी परमाणु हमले से कम नहीं होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का संकट सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक बाजार को हिला सकता है।

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ईरान की रणनीति पर सवाल

Marco Rubio ने यह भी कहा कि ईरान इस समय अंदरूनी आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। उनके अनुसार, “ईरान जिस स्थिति में है, उससे बाहर निकलने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है, लेकिन इसके पीछे उसकी मजबूरी हो सकती है, न कि वास्तविक शांति की इच्छा।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का दृश्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है और जिस पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।


वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता

इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

अगर Strait of Hormuz में किसी तरह का तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहेगा—बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ सकती है।

क्या बातचीत से निकलेगा समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहते हैं।

हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान वास्तव में समझौते की ओर बढ़ता है या फिर तनाव और बढ़ता है।